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  • 2026-08-18

JPSC Exam Irregularities: JSSC-JPSC धांधली में परीक्षा रद्द होने के बाद आंदोलन का दूसरा चरण शुरू, छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने उठाई सिस्टम बदलने की मांग

JPSC Exam Irregularities: JSSC और JPSC भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के खिलाफ छात्रों की लड़ाई अब परीक्षा रद्द कराने से आगे बढ़ गई है. सरकार की ओर से 17 अगस्त की परीक्षा रद्द किए जाने के बाद छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने आंदोलन के अगले चरण का ऐलान किया है.

देवेंद्र नाथ महतो ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि परीक्षा रद्द होना छात्रों की पहली बड़ी मांग की जीत है. लेकिन इसे आंदोलन का अंत नहीं माना जा सकता. अब उनकी मांग ऐसी परीक्षा व्यवस्था की है, जिसमें पेपर लीक या किसी दूसरी गड़बड़ी की संभावना न रहे.

2 जुलाई से शुरू हुई थी छात्रों की लड़ाई
देवेंद्र नाथ महतो ने बताया कि छात्रों का आंदोलन 2 जुलाई को शुरू हुआ था. इसके बाद 21 जुलाई से मामले की CID जांच शुरू हुई. 25 जुलाई को बापू वाटिका से सत्याग्रह की शुरुआत हुई, जिसे बाद में जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम तक ले जाया गया. इसके बाद 2 अगस्त से देवेंद्र नाथ महतो ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की. आंदोलन के दौरान विधानसभा घेराव, तिरंगा यात्रा और मशाल जुलूस भी निकाला गया.

भूख हड़ताल में बिगड़ी तबीयत, ब्रेन हैमरेज का खतरा
महतो ने बताया कि अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के दौरान उनकी तबीयत गंभीर रूप से बिगड़ गई थी. इलाज के दौरान डॉक्टरों ने ब्रेन हैमरेज का खतरा भी बताया था. इसके बावजूद उन्होंने आंदोलन जारी रखा. उन्होंने आंदोलन में सहयोग करने के लिए सरकार, प्रशासन, मीडिया, मेडिकल टीम और साथ देने वाले लोगों का आभार जताया. महतो ने कहा कि उनकी भूख हड़ताल समाप्त हो गई है, लेकिन जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्रों का धरना जारी रहेगा.

अब परीक्षा सिस्टम बदलने की मांग
महतो ने कहा कि केवल परीक्षा रद्द करने या जांच कराने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा. आंदोलन के दूसरे चरण में अब पूरी परीक्षा व्यवस्था को बेहतर और सुरक्षित बनाने की मांग उठाई जाएगी.

उन्होंने भर्ती परीक्षाओं की पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए एक अलग समिति बनाने की मांग रखी. इसके साथ ही परीक्षा व्यवस्था के वित्तीय और प्रशासनिक ऑडिट की भी मांग की. महतो ने प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया को सुरक्षित और पूरी तरह गोपनीय रखने की मांग की. उन्होंने कहा कि प्रश्नपत्र तैयार करने का काम कई चरणों में होना चाहिए, ताकि किसी एक व्यक्ति के पास पूरी प्रक्रिया की जानकारी न रहे. उन्होंने हर चरण के बाद जिम्मेदारी तय करने के लिए लिखित क्लीयरेंस सर्टिफिकेट या एफिडेविट की व्यवस्था लागू करने की मांग भी की.



जवाबदेही तय करने के लिए कानून बदलने की बात
महतो ने कहा कि अगर मौजूदा कानून परीक्षा संस्थाओं की जवाबदेही तय करने में बाधा बन रहा है, तो सरकार को विधानसभा के जरिए उसमें जरूरी बदलाव करना चाहिए. उन्होंने कहा कि छात्रों की जिम्मेदारी पढ़ाई करना और परीक्षा देना है. उन्हें पेपर लीक या परीक्षा में गड़बड़ी के खिलाफ सड़क पर उतरने, लाठी खाने और भूख हड़ताल करने की नौबत नहीं आनी चाहिए. महतो ने स्पष्ट किया कि 17 अगस्त की परीक्षा रद्द होने से आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है. अब आंदोलन का दूसरा चरण शुरू होगा. उनका कहना है कि परीक्षा व्यवस्था में ठोस सुधार और जिम्मेदारी तय करने के लिए कदम उठाए जाने तक छात्रों का धरना जारी रहेगा.
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