साथी को बचाने के प्रयास में दोनों ने गंवाई जान
हादसे का शिकार हुए मृतकों की पहचान औरंगाबाद जिले के ओबरा थाना क्षेत्र स्थित शंकरपुर अमरपुरा गांव निवासी प्रयाग मेहता और शंभू कुमार के रूप में हुई है. परिजनों व प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, गांव से कांवड़ियों का एक दल गुप्ताधाम के लिए निकला था. पहाड़ी रास्ते से गुजरते वक्त अचानक तेज बारिश शुरू हो गई, जिससे पगडंडी पर भारी फिसलन हो गई. यात्रा के दौरान प्रयाग मेहता का पैर फिसल गया. उन्हें बचाने के लिए जब शंभू कुमार ने हाथ बढ़ाया, तो उनका भी संतुलन बिगड़ गया और दोनों एक साथ गहरी ढलान में समा गए.
रेलवे कर्मचारी थे शंभू, गांव में छाया मातम
मृतकों में शामिल शंभू कुमार भारतीय रेलवे में कार्यरत थे और उनकी तैनाती अनुग्रह नारायण रोड रेलवे स्टेशन पर थी. जैसे ही दोनों शिवभक्तों की मौत की खबर उनके पैतृक गांव पहुंची, वहां कोहराम मच गया. सावन की पावन यात्रा के दौरान एक ही गांव के दो लोगों की इस तरह हुई असमय मौत से पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है.
पुलिस ने ग्रामीणों की मदद से खाई से निकाले शव
घटना की जानकारी मिलते ही चेनारी थाना पुलिस की टीम तुरंत मौके पर पहुंची. इलाका बेहद दुर्गम और गहरी ढलान वाला होने के कारण राहत व बचाव कार्य में पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी. अंततः स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से दोनों शवों को खाई से बाहर निकाला गया. पुलिस ने जरूरी कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए सासाराम सदर अस्पताल भेज दिया है.
24 घंटे में दूसरी घटना, कैमूर पहाड़ी के रास्तों पर उठ रहे सवाल
सावन के महीने में बाबा गुप्तेश्वर नाथ के दर्शन के लिए रोजाना हजारों की संख्या में श्रद्धालु गुप्ताधाम पहुंचते हैं. हालांकि, गुफा मंदिर तक जाने वाला यह मार्ग प्राकृतिक रूप से काफी संकरा, ढलान भरा और जोखिम भरा है. चिंताजनक बात यह है कि इस हादसे से ठीक एक दिन पहले भी एक महिला समेत दो श्रद्धालुओं की पहाड़ से गिरकर मौत हो गई थी. बीते दो दिनों के भीतर गुप्ताधाम मार्ग पर हादसों में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर चार हो गई है, जिससे सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं.
बैरिकेडिंग और सुरक्षा की उठ रही मांग
लगातार हो रही दुर्घटनाओं के बाद स्थानीय निवासियों और श्रद्धालुओं में प्रशासन के प्रति नाराजगी है. लोगों ने मांग की है कि अमवा चुआ जैसे अति-संवेदनशील और खतरनाक ढलानों वाले स्थानों पर तुरंत मजबूत बैरिकेडिंग, सपोर्ट रस्सियों और सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की जाए, ताकि सावन के इस पावन अवसर पर आगे ऐसे हादसों को रोका जा सके.