Jharkhand: झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र में मंगलवार को प्रतियोगी परीक्षाओं और छात्रों के आंदोलन को लेकर चल रही राजनीतिक खींचतान के बीच सदन का माहौल अचानक गरमा गया. भाजपा विधायक और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सीपी सिंह ने सदन में नोटों की गड्डी दिखाते हुए सरकार पर सवाल उठाए. इसके बाद सत्ता पक्ष के मंत्री और विधायक विरोध में खड़े हो गए और सदन में जोरदार हंगामा शुरू हो गया.
नोटों की गड्डी लेकर सदन में पहुंचे सीपी सिंह
विधानसभा की कार्यवाही के दौरान सीपी सिंह ने हाथ में नोटों का बंडल लेकर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया. उनके इस प्रदर्शन पर सत्ता पक्ष के सदस्यों ने तत्काल आपत्ति दर्ज कराई. कुछ ही देर में दोनों पक्षों के विधायक आमने-सामने आ गए और सदन में तीखी बहस शुरू हो गई. भाजपा की ओर से इसे सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के तौर पर देखा गया, जबकि सत्ता पक्ष ने सदन के भीतर नोटों की गड्डी दिखाने के तरीके पर सवाल उठाते हुए भाजपा को घेरा.
मुख्यमंत्री ने भाजपा पर साधा निशाना
घटना के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भाजपा विधायकों पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि "व्यापारियों की जमात से ताल्लुक रखने वाले इन लोगों की जेबों में नोटों के बंडल भरे पड़े हैं."मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि धनबल के जरिए लोकतांत्रिक व्यवस्था को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने भाजपा नेताओं और उनके करीबी लोगों के पास कथित तौर पर मौजूद नोटों के बंडलों का भी जिक्र किया और इसे लोकतंत्र के लिए उचित नहीं बताया.
धनबल के इस्तेमाल पर उठाए सवाल
मुख्यमंत्री ने कहा कि राजनीति में पैसे की ताकत का इस्तेमाल कर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश स्वीकार नहीं की जा सकती. उन्होंने विपक्ष पर राजनीतिक लाभ के लिए धार्मिक स्थलों को भी राजनीति का हिस्सा बनाने का आरोप लगाया. हेमंत सोरेन ने कहा कि राजनीतिक हित साधने के लिए मंदिरों तक को नहीं छोड़ा जा रहा है.
छात्रों के मुद्दे पर पहले से जारी है टकराव
झारखंड में JPSC-JSSC समेत प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्र आंदोलन कर रहे हैं. इन मुद्दों को लेकर भाजपा लगातार राज्य सरकार पर सवाल उठा रही है. वहीं, सरकार की ओर से भी विपक्ष के आरोपों का जवाब दिया जा रहा है. इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि के बीच विधानसभा में सीपी सिंह द्वारा नोटों की गड्डी दिखाए जाने से विवाद और बढ़ गया. मंगलवार की कार्यवाही के दौरान इस मुद्दे को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच काफी देर तक तीखी नोकझोंक होती रही और सदन का माहौल हंगामेदार बना रहा.