Ranchi News : इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज (ILS), रांची यूनिवर्सिटी को बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने एक साल के लिए मान्यता दे दी है। BCI ने शर्त रखी है कि विश्वविद्यालय छह महीने के भीतर संस्थान में मौजूद बाकी कमियों को दूर करेगा और इसकी जानकारी शपथपत्र के जरिए देगा। मान्यता मिलने के बाद ILS में इस साल एडमिशन की प्रक्रिया शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है।
हाईकोर्ट में चल रही है सुनवाई
मामला झारखंड हाईकोर्ट में WPC 141/2026, Ambesh Kumar Choubey & Ors. vs. State of Jharkhand & Ors. के रूप में लंबित है। 11 अगस्त को जस्टिस आनंदा सेन की बेंच में मामले की सुनवाई हुई।
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि ILS में लंबे समय से BCI के नियमों का पालन नहीं किया जा रहा था। वर्ष 2024 से BCI ने विश्वविद्यालय को कमियां दूर करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद वर्ष 2025 में एडमिशन लिए जाने का आरोप लगाया गया। इसके बाद छात्रों ने हाईकोर्ट का रुख किया।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने ILS में नए एडमिशन पर रोक लगाई थी, जिसे बाद में हटा दिया गया। लगातार सुनवाई के बाद विश्वविद्यालय ने BCI के पास मान्यता के लिए आवेदन किया और निर्धारित फीस जमा की। इसके बाद BCI ने संस्थान को एक साल की मान्यता दी।
चार फैकल्टी और डायरेक्टर की नियुक्ति
रांची यूनिवर्सिटी की ओर से ILS में चार फैकल्टी और एक डायरेक्टर की नियुक्ति की गई है। हालांकि, याचिकाकर्ताओं का कहना है कि ये नियुक्तियां अभी स्थायी नहीं हैं। उनके अनुसार BCI के नियमों के तहत लॉ संस्थान में फैकल्टी और डायरेक्टर की नियुक्ति स्थायी आधार पर होनी चाहिए। इसलिए मामले से जुड़े कुछ मुद्दे अभी हाईकोर्ट में लंबित हैं।
अधिकारियों को भी कोर्ट ने बुलाया था, छात्रों के हित में बताया फैसला
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने एक चरण में राज्य के चीफ सेक्रेटरी, फाइनेंस सेक्रेटरी, JPSC और HRD सेक्रेटरी को कोर्ट की सहायता के लिए बुलाया था। इस दौरान उच्च शिक्षा विभाग के सचिव ने बताया था कि राज्य के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में चल रहे सेल्फ फाइनेंस कोर्स को रेगुलेट करने के लिए नया सिस्टम तैयार किया जाएगा।
याचिकाकर्ताओं के अनुसार, इसी दिशा में झारखंड यूनिवर्सिटी एक्ट में बदलाव किए गए हैं और सेल्फ फाइनेंस कोर्स से संबंधित प्रावधान भी जोड़े गए हैं। याचिकाकर्ता अम्बेश चौबे ने कहा कि BCI से एक साल की मान्यता मिलना ILS में पढ़ रहे छात्रों और इस साल एडमिशन लेने वाले विद्यार्थियों के हित में है। इससे पढ़ाई और नए एडमिशन को लेकर बनी अनिश्चितता कम होगी।
उन्होंने कहा कि मूल याचिका अभी हाईकोर्ट में लंबित है और कुछ मुद्दों पर सुनवाई बाकी है। उम्मीद है कि बाकी प्रार्थनाओं पर भी कोर्ट छात्रों के हित में उचित फैसला करेगा।