गुप्त सूचना पर नाकेबंदी, बाइक सवार दो संदिग्ध धराए
एसडीपीओ सन्नी वर्धन ने पूरे मामले का खुलासा करते हुए बताया कि 3 अगस्त 2026 को पुलिस को एक बेहद संवेदनशील इनपुट मिला था. जानकारी मिली थी कि कुंदा इलाके से प्रतापपुर की ओर दो संदिग्ध युवक किसी बड़ी हिंसक घटना को अंजाम देने की नियत से निकल चुके हैं. इस सूचना के आधार पर पुलिस ने तुरंत एक विशेष टीम का गठन किया और प्रतापपुर-कुंदा मुख्य मार्ग पर नाकेबंदी कर दी. इसी दौरान बाइक से आ रहे दोनों युवकों ने पुलिसबल को देखकर भागने का प्रयास किया, लेकिन मुस्तैद जवानों ने घेराबंदी कर दोनों को धर दबोचा. पकड़े गए आरोपियों की पहचान कोजरम (कुंदा) निवासी सुरेंद्र गंझू और करील गड़वा निवासी संजय गंझू के रूप में हुई है.
जोनल कमांडर के इशारे पर गाड़ियों में आग लगाने का था प्लान
पुलिस कस्टडी में हुई कड़ी पूछताछ के दौरान दोनों आरोपियों ने अपना गुनाह कबूल कर लिया है. उन्होंने बताया कि वे प्रतिबंधित संगठन भाकपा माओवादी के जोनल कमांडर मनोहर गंझू के सीधे निर्देशों पर काम कर रहे थे. उनका मुख्य मकसद भुरकुंडीह घाटी में मालवाहक वाहनों पर अंधाधुंध फायरिंग करना और उनमें आग लगाना था. उग्रवादी संगठन इस वारदात के जरिए ठेकेदारों, ट्रांसपोर्टरों और आम जनता के बीच अपना खौफ पैदा करना चाहता था.
हथियार, पेट्रोल और बाइक बरामद
तलाशी के दौरान पुलिस ने पकड़े गए माओवादियों के पास से 1 देसी पिस्टल और 5 राउंड जिंदा कारतूस जब्त किए हैं. इसके अलावा आगजनी की घटना को अंजाम देने के लिए लाया गया 1 लीटर पेट्रोल, माचिस, 2 मोबाइल फोन और वारदात में इस्तेमाल की जा रही 1 मोटरसाइकिल भी बरामद कर ली गई है.
गंभीर धाराओं में केस दर्ज, बाकी सदस्यों की तलाश जारी
प्रतापपुर थाना पुलिस ने गिरफ्तार दोनों अभियुक्तों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), आर्म्स एक्ट और 17 सीएलए एक्ट की सख्त धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है. पुलिस के अनुसार, पकड़े गए आरोपियों में से एक का पहले से भी आपराधिक इतिहास रहा है. पूरे सिंडिकेट और गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों का सुराग लगाने के लिए पुलिस संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी कर रही है.