Abhijeet Dipke On Education System: देश की शिक्षा व्यवस्था, छात्र आंदोलनों, मौजूदा राजनीतिक हालात और अपनी संगठनात्मक रणनीति को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने खुलकर अपनी बात रखी. महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में उन्होंने कहा कि उनका संगठन किसी एक राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि देश की पूरी व्यवस्था में मौजूद खामियों के खिलाफ संघर्ष कर रहा है. उन्होंने स्पष्ट किया कि जहां भी छात्रों के अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठेंगे, उनकी पार्टी उनके साथ मजबूती से खड़ी होगी.
देशभर में शिक्षा व्यवस्था संकट में, छात्रों की आवाज सुनी जानी चाहिए
समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में अभिजीत दिपके ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था की समस्या किसी एक राज्य तक सीमित नहीं है. देश के अधिकांश हिस्सों में छात्र परेशान हैं और उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि यदि कहीं भी शिक्षा और छात्रों के भविष्य से जुड़ा मुद्दा उठता है तो उनकी पार्टी उसका समर्थन करेगी और छात्रों की आवाज बुलंद करेगी.
"हमारी लड़ाई व्यवस्था से है, किसी एक दल से नहीं"
अभिजीत दिपके ने कहा कि उनकी लड़ाई पूरे सिस्टम के खिलाफ है. उन्होंने कहा कि फिलहाल केंद्र में भाजपा की सरकार है, इसलिए मौजूदा विरोध उसी सरकार के खिलाफ दिखाई देता है. अगर सत्ता में कोई दूसरी पार्टी होती, तो उसी से जवाब मांगा जाता. उन्होंने यह भी कहा कि कई लोग पूछते हैं कि उन्होंने अन्य मुद्दों पर विरोध क्यों नहीं किया, लेकिन उनका पहला आंदोलन लगातार 36 दिनों तक चला, इसलिए उस दौरान दूसरे स्थानों पर जाना संभव नहीं था.
झारखंड के आंदोलनकारी छात्रों को दिया समर्थन
झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन पर भी अभिजीत दिपके ने अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने बताया कि रविवार को उन्होंने झारखंड के आंदोलनकारी छात्रों से बातचीत की थी. उन्होंने छात्रों से कहा कि उनकी सभी मांगों का संगठन समर्थन करता है और उन्हें आंदोलन जारी रखना चाहिए. उन्होंने भरोसा दिलाया कि जरूरत पड़ने पर हर संभव मदद उपलब्ध कराई जाएगी. हालांकि उन्होंने बताया कि फिलहाल तबीयत ठीक नहीं होने के कारण वह यात्रा नहीं कर पा रहे हैं, लेकिन स्वस्थ होने के बाद अन्य राज्यों का भी दौरा करेंगे.
केंद्रीय एजेंसियों के इस्तेमाल पर उठाए सवाल
बातचीत के दौरान अभिजीत दिपके ने विपक्षी दलों के कमजोर होने के पीछे केंद्रीय जांच एजेंसियों के कथित इस्तेमाल का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने कहा कि उनके अनुसार प्रवर्तन निदेशालय (ED) और सीबीआई जैसी एजेंसियों का उपयोग विपक्षी दलों के खिलाफ किया गया. महाराष्ट्र की राजनीति का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी जैसे बड़े दलों में हुए विभाजन से विपक्ष कमजोर हुआ है.
"लोकतंत्र में जनता की बात सुनना सरकार की जिम्मेदारी"
लोकतंत्र पर अपनी राय रखते हुए अभिजीत दिपके ने कहा कि जब बड़ी संख्या में नागरिक या छात्र अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाते हैं तो सरकार की जिम्मेदारी है कि वह उनकी बात सुने और उस पर गंभीरता से विचार करे. उन्होंने कहा कि यदि बड़ी संख्या में छात्र किसी मंत्री को हटाने की मांग कर रहे हैं, तो सरकार को उस मांग पर ध्यान देना चाहिए. हालांकि उन्होंने इसे अपना व्यक्तिगत राजनीतिक मत बताया.
किसी दल के पक्ष या विरोध में नहीं करता संगठन
अभिजीत दिपके ने कहा कि उनकी पार्टी किसी विशेष राजनीतिक दल के समर्थन या विरोध के लिए काम नहीं करती. उन्होंने कहा कि यदि किसी भी सरकार के कार्यकाल में छात्रों के साथ अन्याय होगा, तो उनका संगठन सत्ता में मौजूद किसी भी दल के खिलाफ आवाज उठाएगा. उनके मुताबिक मुख्यमंत्री या शिक्षा मंत्री किसी भी पार्टी के हों, छात्रों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए.
अन्ना हजारे से तुलना पर भी रखी राय
अभिजीत दिपके ने कहा कि उन्हें किसी भी सामाजिक या ऐतिहासिक व्यक्तित्व से तुलना पसंद नहीं है. उन्होंने कहा कि उन्हें अन्ना हजारे या महात्मा गांधी जैसे संबोधनों से नहीं जोड़ा जाए. वह चाहते हैं कि लोग उन्हें उनकी अपनी पहचान और काम के आधार पर जानें.