Jharkhand: झारखंड विधानसभा के आगामी मानसून सत्र को लेकर प्रशासनिक तैयारियां तेज हो गई हैं। 6 अगस्त से शुरू होकर 12 अगस्त तक चलने वाले इस महत्वपूर्ण सत्र के सुचारू संचालन के लिए सोमवार को विधानसभा अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो ने एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। विधानसभा अध्यक्ष के वेश्म (कक्ष) में आयोजित इस बैठक में राज्य सरकार, शासन-प्रशासन और पुलिस विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। इस दौरान सत्र के दौरान सदन की कार्यवाही को निर्बाध चलाने, पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था, प्रशासनिक समन्वय और विधायी प्रक्रियाओं से जुड़े तमाम पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की गई।
विधायकों के सवालों के समयबद्ध जवाब और विधेयकों की प्रतियां देने का आदेश
बैठक में विधानसभा अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो ने अधिकारियों को स्पष्ट हिदायत दी कि विधायकों द्वारा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर समय सीमा के भीतर उपलब्ध कराए जाएं। उन्होंने कहा कि अक्सर सदस्यों की ओर से यह शिकायत सामने आती है कि प्रश्नों के उत्तर देर से मिलते हैं या विधेयकों की प्रतियां समय पर उपलब्ध नहीं हो पाती हैं। स्पीकर ने सभी विभागों को निर्देशित किया कि विधानसभा से जुड़े सभी मामलों को सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाए, ताकि सदन का संचालन सुव्यवस्थित ढंग से हो सके।
विधानसभा परिसर में सुरक्षा चाक-चौबंद रखने का निर्देश
सत्र के दौरान संभावित धरना-प्रदर्शन, घेराव और आंदोलनों को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष मंथन किया गया। स्पीकर ने राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) सहित अन्य वरीय पुलिस अधिकारियों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए। इसके साथ ही उन्होंने सभी राजनीतिक दलों के नेताओं और विधायकों से अपील की कि वे सदन की गरिमा बनाए रखते हुए सकारात्मक सहयोग दें, ताकि जनहित के ज्वलंत मुद्दों पर सार्थक चर्चा हो सके।
JPSC परीक्षा में गड़बड़ी और कानून-व्यवस्था पर सरकार को घेरेगा विपक्ष
पांच कार्यदिवसों वाले इस मानसून सत्र में विपक्ष ने सरकार को विभिन्न मोर्चों पर घेरने की पूरी रणनीति बना ली है। विपक्ष द्वारा मुख्य रूप से जेपीएससी (JPSC) परीक्षा में कथित अनियमितताओं, राज्य में बिगड़ती कानून-व्यवस्था और स्थानीय जनहित के मुद्दों को जोर-शोर से उठाने की तैयारी है। वहीं, विपक्ष के आक्रामक रुख पर प्रतिक्रिया देते हुए संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं और छात्रों के भविष्य को लेकर पूरी तरह संवेदनशील है। उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष लोकतांत्रिक दायरे में रहकर सवाल उठाएगा तो सरकार हर मुद्दे का बिंदुवार जवाब देने के लिए तैयार है, लेकिन केवल हंगामा करने से मुख्य विषय गौण हो जाते हैं।
1390 शासकीय आश्वासन लंबित, 321 शून्यकाल की सूचनाओं पर जवाब न मिलने पर नाराजगी
समीक्षा बैठक के दौरान विधानसभा से जुड़े विभिन्न लंबित मामलों के आंकड़ों पर गहरी चिंता व्यक्त की गई। विधानसभा के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, पूर्व के सत्रों में सरकार की ओर से दिए गए 1,390 आश्वासनों पर अब तक संबंधित विभागों द्वारा कोई प्रगति रिपोर्ट या अंतिम जवाब दाखिल नहीं किया गया है। इसके अलावा, विधायकों द्वारा शून्यकाल (Zero Hour) के दौरान उठाए गए 440 जनहित के मामलों में से 321 मामलों पर विभागीय जवाब लंबित हैं। विशेषकर शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास और पथ निर्माण जैसे जनसरोकार से जुड़े महत्वपूर्ण विभागों की इस ढिलाई पर नाराजगी जताई गई। स्पीकर ने अधिकारियों को सख्त ताकीद की कि सभी लंबित मामलों का अविलंब निस्तारण किया जाए।