कर्मचारियों के अभाव से प्रभावित हो रही व्यवस्था
बिजली विभाग में लंबे समय से कर्मचारियों और अधिकारियों की भारी किल्लत बनी हुई है. विभागीय अमले की कमी का सीधे तौर पर असर दैनिक कामकाज और विद्युत आपूर्ति व्यवस्था पर पड़ रहा है. इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान निकालने और व्यवस्था को सुचारू बनाने के उद्देश्य से ही प्रबंधन ने जल्द से जल्द नई नियुक्तियां करने का निर्णय लिया है.
कनीय अभियंताओं के अधिकांश पद पड़े हैं खाली
ताजा आंकड़ों के अनुसार, पूरे राज्य में कनीय अभियंता (Junior Engineer) के करीब 800 पद खाली हैं. स्वीकृत पदों के मुकाबले महज 65 कनीय अभियंता ही फिलहाल पूरे राज्य में अपनी सेवाएं दे पा रहे हैं. राजधानी रांची की स्थिति भी काफी चिंताजनक है, जहां स्वीकृत 87 पदों के सापेक्ष केवल 9 कनीय अभियंता पूरी बिजली आपूर्ति व्यवस्था को संभालने के लिए मजबूर हैं.
एक ही अधिकारी पर कई सब-स्टेशनों का अतिरिक्त प्रभार
स्टाफ की इस अप्रत्याशित कमी के कारण एक-एक अधिकारी को कई सब-स्टेशनों की जिम्मेदारी एक साथ निभानी पड़ रही है. वर्कलोड अत्यधिक होने की वजह से आम उपभोक्ताओं की बिजली से जुड़ी समस्याओं और शिकायतों का त्वरित समाधान करने में काफी समय लग जाता है, जिससे लोगों को परेशानी झेलनी पड़ती है.
तकनीकी और गैर-तकनीकी श्रेणियों में बांटे गए पद
विभाग द्वारा तैयार खाके के अनुसार, इस भर्ती अभियान में तकनीकी और गैर-तकनीकी दोनों वर्गों के पद शामिल किए गए हैं. इसमें सबसे ज्यादा 795 पद कनीय अभियंता (JE) के हैं, जबकि 372 पद सहायक अभियंता (AE) और 180 पद अकाउंटेंट के निर्धारित किए गए हैं. इनके अलावा लाइनमैन, तकनीकी सहायक और अन्य अधीनस्थ श्रेणियों के लिए 2,000 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी.
पारदर्शी प्रक्रिया के साथ नियमावली को अंतिम रूप देने की तैयारी
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पूरी बहाली प्रक्रिया को पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से आयोजित करने का निर्देश दिया है. ऊर्जा सचिव सह सीएमडी के श्रीनिवासन के अनुसार, विभाग में 3,000 से अधिक पद रिक्त हैं. वर्तमान में भर्ती नियमावली को अंतिम रूप देने का काम तेजी से चल रहा है और नवंबर 2026 तक आधिकारिक अधिसूचना जारी कर आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी.