Jharkhand: झारखंड अर्बन इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड (जुडको) ने राज्य की दो महत्वपूर्ण शहरी जलापूर्ति परियोजनाओं में काम की धीमी गति और अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन करने वाली दो बड़ी कार्यदायी एजेंसियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। जिडको ने कार्रवाई करते हुए “एमएस शंभू सिंह” और “एमएस आरएमएन-श्री सुभा जेवी” को एक साल की अवधि के लिए डिबार (प्रतिबंधित) कर दिया है। इस प्रतिबंध के लागू होने के बाद दोनों एजेंसियां अगले एक वर्ष तक नगर विकास एवं आवास विभाग तथा जुडको की ओर से निकाली जाने वाली किसी भी नई निविदा या खरीद प्रक्रिया में हिस्सा नहीं ले सकेंगी।
गढ़वा में 10 हजार कनेक्शन के लक्ष्य के मुकाबले मिले केवल 2,507 कनेक्शन
गढ़वा नगर परिषद क्षेत्र में हर घर तक नल से पानी पहुंचाने की जिम्मेदारी एमएस शंभू सिंह एजेंसी को सौंपी गई थी। इस योजना के तहत एजेंसी को कुल 10,484 घरेलू जल कनेक्शन प्रदान करने थे, लेकिन निर्धारित समय सीमा बीत जाने के बावजूद कंपनी लक्ष्य से काफी पीछे रही। जिडको के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, एजेंसी अब तक कुल 2,507 कनेक्शन ही दे पाई है, जिनमें से भी केवल 1,890 कनेक्शन ही ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज किए जा सके हैं। इस परियोजना की भौतिक प्रगति 65.5 प्रतिशत रही, जो मुख्य रूप से केवल सामग्री आपूर्ति तक सीमित थी, जबकि वित्तीय प्रगति मात्र 30.66 प्रतिशत ही दर्ज की गई।
गढ़वा जलापूर्ति परियोजना के प्रमुख आंकड़े और अनुबंध की शर्तें
गढ़वा में जलापूर्ति व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से 5 करोड़ 87 लाख 10 हजार 400 रुपये की अनुबंध राशि तय की गई थी। इसके लिए 21 जनवरी 2025 को अनुबंध जारी किया गया था और एजेंसी को 30 जनवरी 2025 को कार्यादेश (वर्क ऑर्डर) दिया गया था। योजना को पूर्ण करने के लिए 30 अप्रैल 2025 तक की समय सीमा तय की गई थी। हालांकि, निर्धारित अवधि में काम पूरा न होने और बार-बार चेतावनी के बावजूद जमीनी प्रगति न दिखने के कारण जुडको को यह सख्त कदम उठाना पड़ा।
रामगढ़ योजना में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट और पाइपलाइन निर्माण में रही घोर ढिलाई
जुडको द्वारा दूसरी बड़ी कार्रवाई एमएस आरएमएन-श्री सुभा जेवी के खिलाफ की गई है, जिसे वर्ष 2023 में अनुबंध संख्या-591 के तहत रामगढ़ नगर परिषद और रामगढ़ छावनी बोर्ड क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति को सुव्यवस्थित करने का जिम्मा मिला था। जांच रिपोर्ट में पाया गया कि योजना से जुड़े वाटर ट्रीटमेंट प्लांट (WTP) का निर्माण तय लक्ष्य से काफी पीछे था। इसके अलावा, कई महत्वपूर्ण स्थानों पर ओवरहेड वाटर टैंक का निर्माण शुरू ही नहीं हो पाया या बेहद धीमी गति से चला, पाइपलाइन बिछाने का काम अधूरा छोड़ दिया गया और कार्यस्थल पर पर्याप्त संख्या में मजदूर, मशीनरी व तकनीकी विशेषज्ञों की तैनाती नहीं की गई।
कारण बताओ नोटिस और संतोषजनक जवाब न मिलने पर हुआ टर्मिनेशन
कार्रवाई से पहले जुडको ने संबंधित एजेंसी को सुधार के कई मौके दिए थे। रामगढ़ योजना को लेकर पहले जनवरी 2024 में शो-कॉज नोटिस दिया गया था, जिसके बाद स्थिति में सुधार न होने पर फरवरी 2026 में अंतिम रूप से टर्मिनेशन प्रक्रिया के तहत दोबारा कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। कंपनी द्वारा प्रस्तुत किए गए स्पष्टीकरण की समीक्षा के बाद अधिकारियों ने पाया कि कंपनी के दावे और जवाब धरातल की वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाते हैं, जिसके बाद एजेंसी के जवाब को खारिज करते हुए डिबार करने का निर्णय लिया गया।
एक साल के डिबारमेंट के तहत एजेंसियों पर लागू रहेंगे कड़े प्रतिबंध
एक वर्ष की डिबार अवधि के दौरान दोनों कंपनियों पर कई प्रशासनिक और व्यावसायिक प्रतिबंध प्रभावी रहेंगे। एजेंसियां जुडको की किसी भी नई टेंडर प्रक्रिया में स्वतंत्र रूप से या किसी संयुक्त उपक्रम (JV) और कंसोर्टियम के माध्यम से शामिल नहीं हो सकेंगी। इसके साथ ही, इनके पुराने व लंबित मामलों की नियमानुसार समीक्षा की जाएगी और इस डिबारमेंट का स्थायी रिकॉर्ड जिडको के डेटाबेस में दर्ज रहेगा, जिसे भविष्य की निविदाओं में भी ध्यान में रखा जाएगा। जिडको ने स्पष्ट किया है कि जनहित से जुड़ी पेयजल योजनाओं में किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।