तालाब की जमीन को लेकर क्या है पूरा मामला
पाकुड़ जिला प्रशासन तालाब की जमीन पर बने कथित अवैध निर्माण को हटाने की तैयारी कर रहा था. इसी कार्रवाई के खिलाफ बैंक कॉलोनी निवासी धर्मेंद्र सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर ध्वस्तीकरण नोटिस पर रोक लगाने की मांग की. याचिकाकर्ता का कहना था कि संबंधित जमीन उनकी निजी रैयती संपत्ति है. उनका दावा था कि पहले वहां तालाब बनवाया गया था, जिसे बाद में भरकर मकान बनाया गया. दूसरी ओर प्रशासन ने वर्ष 2015 के अदालत के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि जमीन को फिर से तालाब के रूप में बहाल करना है और एसपीटी एक्ट की धारा 35 के तहत अनुमति के बिना इसका उपयोग नहीं बदला जा सकता.
हाईकोर्ट ने क्यों खारिज की याचिका
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति आनंद सेन की एकल पीठ ने की. अदालत ने कहा कि भले ही धर्मेंद्र सिंह वर्ष 2015 के मामले में पक्षकार नहीं थे, लेकिन एकल पीठ किसी दूसरी एकल पीठ के अंतिम आदेश में हस्तक्षेप नहीं कर सकती. कोर्ट ने इसे न्यायिक मर्यादा का विषय बताया. साथ ही स्पष्ट किया कि यदि याचिकाकर्ता को पुराने आदेश पर आपत्ति है तो वह नियमानुसार अपील दायर कर सकते हैं. इसके आधार पर अदालत ने मौजूदा याचिका खारिज कर दी.
अब प्रशासन की अगली कार्रवाई
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि प्रशासन उसी दिन ध्वस्तीकरण की कार्रवाई कर सकता है. इसे देखते हुए अदालत ने आदेश की प्रति तत्काल उपलब्ध कराने का निर्देश दिया. हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब पाकुड़ जिला प्रशासन वर्ष 2015 के आदेश के अनुरूप संबंधित जमीन को तालाब के रूप में बहाल करने की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकता है. मामले में अभी तक इस फैसले पर प्रशासन की ओर से कोई नया आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है.