26 जुलाई तक दर्ज मामलों पर कार्रवाई वापस होगी
सरकार के मुताबिक 26 जुलाई की शाम छह बजे तक आंदोलन के संबंध में दर्ज सभी एफआईआर, परिवाद और कारण बताओ नोटिस निरस्त कर दिए जाएंगे. साथ ही यह भरोसा भी दिया गया है कि इस आंदोलन में शामिल लोगों के खिलाफ आगे किसी तरह की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष कार्रवाई नहीं की जाएगी. छात्र संगठनों का कहना है कि वे लंबे समय से इसी मांग को उठा रहे थे.
आंदोलन दोबारा शुरू करने की चेतावनी के बाद आया फैसला
सरकारी घोषणा से पहले कालकोरच जनता पार्टी (CJP) ने चेतावनी दी थी कि यदि प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामले वापस नहीं लिए गए तो संगठन फिर से आंदोलन शुरू करेगा. पार्टी का दावा था कि सरकार के साथ बातचीत के दौरान मामलों की वापसी पर सहमति बन चुकी थी, लेकिन आधिकारिक आदेश जारी नहीं होने से स्थिति स्पष्ट नहीं थी. इसके बाद सरकार ने औपचारिक रूप से कार्रवाई वापस लेने का निर्णय लिया.
सैकड़ों लोग हिरासत में लिए गए, कानूनी मदद का भी एलान
पुलिस मुख्यालय की जानकारी के अनुसार आंदोलन के दौरान 694 लोगों को हिरासत में लिया गया था. इनमें 339 नाबालिगों को बाद में रिहा कर दिया गया, जबकि हिंसा के आरोप में 355 लोगों को अदालत में पेश किया गया. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस दौरान 91 पुलिसकर्मी घायल हुए. सारण में दो प्रखंड विकास पदाधिकारी गंभीर रूप से जख्मी हुए, जबकि सीवान और सीतामढ़ी के पुलिस अधीक्षक समेत कई अधिकारियों को भी चोटें आईं.
इस बीच वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने प्रदर्शनकारियों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के लिए एक करोड़ रुपये देने की घोषणा की है. उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में छात्रों के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई होती है तो उन्हें कानूनी मदद दी जाएगी. फिलहाल सरकार के फैसले के बाद अब सभी की नजर मामलों की वापसी और रिहाई की प्रक्रिया पूरी होने पर टिकी है.