Parliament Protest Action: दिल्ली में मानसून सत्र के पहले दिन आयोजित चलो संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है. समाजवादी पार्टी, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने छात्रों के साथ कथित लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल पर सवाल उठाए हैं. वहीं प्रशासन का कहना है कि पूरी कार्रवाई कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए की गई.
विपक्ष ने सरकार से मांगा जवाब
प्रदर्शन के बाद विपक्षी नेताओं ने केंद्र सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाया. समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि लोकतंत्र में युवाओं की मांगों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए. उनका दावा है कि छात्रों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय उनके खिलाफ कार्रवाई की गई. उन्होंने NEET और रोजगार जैसे मुद्दों पर भी सरकार से जवाब देने की मांग की.
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि यदि प्रदर्शन शांतिपूर्ण था तो बल प्रयोग उचित नहीं माना जा सकता. उन्होंने पूरे घटनाक्रम पर सरकार से स्पष्टीकरण देने और संवाद के जरिए समाधान निकालने की बात कही. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग पर चिंता जताते हुए निष्पक्ष समीक्षा की मांग की.
इंटरनेट सेवा और पुलिस कार्रवाई पर भी सवाल
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी छात्रों के समर्थन में प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि युवाओं और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए. वहीं तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने दावा किया कि प्रदर्शन स्थल के आसपास इंटरनेट सेवाएं प्रभावित रहीं. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों के साथ सख्ती बरती गई, जो लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय है.
प्रशासन अपने रुख पर कायम
प्रशासन का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए. अधिकारियों के मुताबिक हालात को नियंत्रित रखने के उद्देश्य से कार्रवाई की गई थी. समाचार लिखे जाने तक विपक्ष की मांगों पर केंद्र सरकार की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है और प्रशासन अपने फैसले पर कायम है.