Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि यदि किसी सरकारी अनुबंध के दौरान एक्साइज ड्यूटी में कमी आती है, तो उसका लाभ ठेकेदार नहीं बल्कि झारखंड ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड (JUVNL) को मिलेगा। अदालत ने M/s Jay Bee Enterprises की याचिका खारिज करते हुए JUVNL द्वारा बिल से की गई 18.49 लाख रुपये की कटौती को सही ठहराया।
न्यायमूर्ति आनंद सेन की अदालत ने कहा कि जब कर बढ़ने पर अतिरिक्त भार JUVNL वहन करता है, तो कर घटने का लाभ भी उसी को मिलना चाहिए। यदि इस लाभ को ठेकेदार को दिया जाए तो उसे बिना किसी औचित्य के आर्थिक फायदा मिलेगा, जो स्वीकार्य नहीं है।
कोर्ट बोला- टैक्स कम होने से ठेकेदार की लागत नहीं बढ़ी
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि एक्साइज ड्यूटी कम होने से ठेकेदार की लागत या मुनाफे पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा, बल्कि केवल उसकी कर देनदारी घटी। इसलिए कर में हुई कमी का लाभ भुगतान करने वाली संस्था या अंततः उपभोक्ता तक पहुंचना चाहिए।
2009 की परियोजना से जुड़ा था मामला
मामला वर्ष 2009 में कतरास की 10वीं APDRP परियोजना से जुड़ा है। इस परियोजना का ठेका M/s Jay Bee Enterprises को मिला था। अनुबंध के अनुसार सामग्री की कीमत में सभी कर और एक्साइज ड्यूटी शामिल थी। कार्य के दौरान केंद्र सरकार ने एक्साइज ड्यूटी 8 प्रतिशत से घटाकर 6 प्रतिशत कर दी। इसके बाद JUVNL ने ठेकेदार के बिल से 18.49 लाख रुपये की कटौती कर ली। ठेकेदार ने इसे अनुचित बताते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
सुनवाई के दौरान कंपनी ने तर्क दिया कि अनुबंध की राशि तय होने के बाद उसमें बदलाव नहीं किया जा सकता। वहीं JUVNL ने अदालत को बताया कि निविदा की शर्तों के अनुसार कर में होने वाले बदलाव का समायोजन किया जाना था। अदालत ने JUVNL की दलील स्वीकार करते हुए याचिका खारिज कर दी।