Jharkhand News: झारखंड में देशी शराब उद्योग एक नए विवाद के केंद्र में आ गया है. कुछ चुनिंदा कंपनियों को मॉल्ट स्पिरिट के इस्तेमाल की अनुमति मिलने के बाद शराब कारोबार से जुड़े अन्य निर्माता सवाल उठा रहे हैं. उनका आरोप है कि परमिट वितरण में समानता नहीं बरती गई, जिससे बाजार में प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो रही है.
क्या है पूरा मामला?
राज्य में तैयार होने वाली 25 डिग्री देशी शराब के उत्पादन में सामान्य तौर पर एक्स्ट्रा न्यूट्रल अल्कोहल (ENA) का इस्तेमाल किया जाता है. इसके लिए उत्पाद विभाग की ओर से कंपनियों को ईएनए का परमिट जारी किया जाता है. दूसरी ओर मॉल्ट स्पिरिट का उपयोग आमतौर पर भारत निर्मित विदेशी शराब (IMFL) के निर्माण में किया जाता है.
सूत्रों के अनुसार हाल ही में उत्पाद विभाग ने कुछ देशी शराब निर्माता कंपनियों को भी मॉल्ट स्पिरिट इस्तेमाल करने की अनुमति दे दी. इसके बाद अन्य कंपनियों ने भी समान परमिट की मांग की, लेकिन उन्हें स्वीकृति नहीं मिली. यहीं से विवाद शुरू हो गया.
कीमत में बड़ा अंतर, प्रतिस्पर्धा पर सवाल
शराब कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि मॉल्ट स्पिरिट की कीमत करीब 400 से 500 रुपये प्रति लीटर है, जबकि ईएनए 80 से 85 रुपये प्रति लीटर में उपलब्ध हो जाता है. उनका दावा है कि कुछ कंपनियां सीमित मात्रा में मॉल्ट स्पिरिट मिलाकर अपने उत्पाद का स्वाद बेहतर बना रही हैं, जिससे उनकी बिक्री बढ़ रही है.
लेबलिंग को लेकर भी उठे सवाल
कुछ शराब निर्माताओं का आरोप है कि जिन कंपनियों को मॉल्ट स्पिरिट के उपयोग की अनुमति मिली है, वे अपने उत्पाद के लेबल पर इसकी स्पष्ट जानकारी नहीं दे रही हैं. उनका कहना है कि इससे उपभोक्ताओं के साथ पारदर्शिता प्रभावित होती है और बाजार में असमान प्रतिस्पर्धा की स्थिति बनती है.