Namkum Land Probe: रांची के नामकुम अंचल में जमीन के म्यूटेशन, राजस्व अभिलेखों के गायब होने और कथित अनियमितताओं से जुड़े मामले में जांच का जिम्मा अब भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) को सौंप दिया गया है. झारखंड सरकार ने उच्च न्यायालय को बताया कि कैबिनेट सचिव ने एसीबी को प्रारंभिक जांच (पीई) दर्ज करने की अनुमति दे दी है. इसके बाद अदालत ने जांच आगे बढ़ाने का निर्देश देते हुए चार सप्ताह के भीतर प्रगति रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में पेश करने को कहा है.
चार सप्ताह में रिपोर्ट, 21 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
झारखंड हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति राजेश शंकर की अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान एसीबी को निर्देश दिया गया कि वह प्रारंभिक जांच पूरी कर उसकी प्रगति रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में अदालत के समक्ष प्रस्तुत करे. मामले की अगली सुनवाई 21 अगस्त को निर्धारित की गई है. इससे पहले अदालत ने कैबिनेट सचिव को एक सप्ताह के भीतर जांच की अनुमति देने का निर्देश दिया था और स्पष्ट किया था कि अनावश्यक देरी को गंभीरता से लिया जाएगा. साथ ही इस संबंध में शपथ-पत्र दाखिल करने को भी कहा गया था.
म्यूटेशन और राजस्व रिकॉर्ड में गड़बड़ी का आरोप
याचिकाकर्ता थॉमस साइमन ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि नामकुम अंचल के डुंडु क्षेत्र स्थित विवादित जमीन के दाखिल-खारिज की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुईं. उनका कहना है कि जांच के लिए जरूरी मूल राजस्व अभिलेख कई बार मांगने के बावजूद उपलब्ध नहीं कराए गए. पिछली सुनवाई में अदालत के सामने यह भी बताया गया था कि संबंधित अंचल कार्यालय दूसरे पक्ष के पक्ष में किए गए म्यूटेशन की प्रमाणित प्रति देने में लगातार टालमटोल करता रहा, जबकि हाईकोर्ट पहले ही दस्तावेज उपलब्ध कराने का आदेश दे चुका था. अदालत ने आदेश का पालन नहीं होने पर नाराजगी भी जताई थी.
एसीबी जांच के बाद तय होगी आगे की कार्रवाई
उच्च न्यायालय ने प्रथम दृष्टया सरकारी रिकॉर्ड में संभावित छेड़छाड़ और अनियमितताओं को गंभीर मानते हुए मामले की प्रारंभिक जांच एसीबी से कराने का निर्देश दिया है. अब जांच एजेंसी राजस्व अभिलेखों के गायब होने, म्यूटेशन प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल करेगी. एसीबी की रिपोर्ट मिलने के बाद अदालत आगे की कार्रवाई पर फैसला करेगी, जिसमें नियमित प्राथमिकी दर्ज करने सहित अन्य आवश्यक निर्देश भी शामिल हो सकते हैं. सुनवाई के दौरान एसीबी की ओर से वरिष्ठ स्थायी अधिवक्ता सुमित गाड़ोदिया ने पक्ष रखा, जबकि याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता जे.जे. सांगा ने अपनी दलीलें पेश कीं.