DSP UC Jha Murder Case: झारखंड हाईकोर्ट ने वर्ष 2000 के बहुचर्चित डीएसपी यू.सी. झा हत्याकांड में राज्य सरकार की अपील खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है. अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ ऐसे साक्ष्य पेश नहीं कर सका, जिनके आधार पर दोष संदेह से परे साबित हो सके.
ट्रायल कोर्ट के फैसले में दखल से इनकार
खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि 19 जून 2013 को ट्रायल कोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सभी आरोपियों को बरी किया था. रिकॉर्ड का परीक्षण करने के बाद हाईकोर्ट को उस फैसले में हस्तक्षेप की कोई ठोस वजह नहीं मिली.
प्रदर्शन के दौरान हुई थी घटना
मामला 28 दिसंबर 2000 का है. डोरंडा के राजेंद्र चौक पर सड़क दुर्घटना में एक बच्ची की मौत के बाद लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया था. प्रदर्शन के दौरान स्थिति हिंसक हो गई, पथराव और आगजनी हुई. इसी दौरान तत्कालीन डीएसपी यू.सी. झा गंभीर रूप से घायल हो गए थे. बाद में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई थी.
सरकार की दलील कोर्ट ने नहीं मानी
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने तर्क दिया कि गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्यों का सही तरीके से मूल्यांकन नहीं किया गया. सरकार ने यह भी कहा कि जांच अधिकारी के समक्ष दिया गया बयान मृत्यु पूर्व कथन के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए था.
पहचान नहीं होने से कमजोर पड़ा मामला
हाईकोर्ट ने कहा कि मामले के प्रमुख गवाह अदालत में आरोपियों की पहचान नहीं कर सके. साथ ही जांच के दौरान किसी भी आरोपी की टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेड (TIP) नहीं कराई गई. अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल प्राथमिकी में नाम दर्ज होना किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त आधार नहीं हो सकता.