Ranchi News : झारखंड हाई कोर्ट ने अपने आदेश का पालन नहीं किए जाने पर कड़ा रुख अपनाते हुए पलामू के जिला शिक्षा अधीक्षक (DSE) को 5 अगस्त को सशरीर अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह भी पूछा है कि आदेश की अवहेलना करने पर उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए।
यह मामला पलामू के सहायक शिक्षक नंदू राम की अवमानना याचिका से जुड़ा है। इससे पहले हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि एकल पीठ के आदेश का पालन करते हुए नंदू राम को पुनर्बहाली से पूर्व की अवधि के सभी सेवा लाभ दिए जाएं। अदालत ने सरकार की ओर से आठ सप्ताह का अतिरिक्त समय देने की मांग भी खारिज कर दी थी।
पुनर्बहाली हुई, लेकिन बकाया वेतन और अन्य लाभ अब तक लंबित
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता प्रेम पुजारी ने अदालत को बताया कि मई 2026 में नंदू राम को दोबारा सेवा में बहाल कर दिया गया, लेकिन जिस अवधि में उन्हें सेवा से बाहर रखा गया था, उस दौरान का वेतन और अन्य सेवा लाभ अब तक नहीं दिए गए हैं। जबकि हाई कोर्ट की एकल पीठ ने स्पष्ट रूप से पुनर्बहाली के साथ सभी बकाया लाभ देने का आदेश दिया था।
1999 में हुई थी नियुक्ति, बीमारी के बाद लौटने पर नहीं मिली जॉइनिंग
नंदू राम की नियुक्ति 31 दिसंबर 1999 को पलामू के सरकारी मध्य विद्यालय, विश्रामपुर में सहायक शिक्षक के रूप में हुई थी। वर्ष 2004 में गंभीर अवसाद के कारण वे लंबे इलाज पर चले गए थे। जनवरी 2012 में चिकित्सकीय रूप से स्वस्थ होकर लौटने के बाद उन्हें स्कूल में योगदान देने की अनुमति नहीं दी गई और बाद में सेवा से हटा दिया गया।
इसके खिलाफ उन्होंने झारखंड हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। एकल पीठ ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया, जिसे राज्य सरकार ने खंडपीठ में चुनौती दी। हालांकि खंडपीठ ने भी सरकार की अपील खारिज कर दी। आदेश के बावजूद सेवा लाभ नहीं मिलने पर अब हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए संबंधित अधिकारी को तलब किया है।