Jamshedpur News: पूर्वी सिंहभूम में मलेरिया के बढ़ते मामलों के बीच जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है. उपायुक्त राजीव रंजन ने लोगों से अपील की है कि बुखार आने पर लापरवाही न करें और तुरंत नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र या सदर अस्पताल में जांच कराएं. उन्होंने कहा कि समय पर इलाज मिलने से मलेरिया पूरी तरह ठीक हो सकता है.
लापरवाही पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई
मलेरिया से हुई मौतों के बाद स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है. डीसी ने बताया कि पोटका के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को लापरवाही के आरोप में निलंबित कर दिया गया है. इसके अलावा सदर अस्पताल के एक चिकित्सक को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है. उनके चिकित्सकीय दायित्वों और मरीज के इलाज में निभाई गई भूमिका को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया है. पूरे मामले की रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग को भेज दी गई है.
उपायुक्त ने बताया कि सिविल सर्जन ने भी अपने स्तर पर कई स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ शोकॉज और निलंबन की कार्रवाई की है. मामले की जांच जारी है और दोषी पाए जाने वालों पर आगे भी कार्रवाई होगी.
एक लाख से अधिक लोगों की हुई जांच
राजीव रंजन ने बताया कि जिले में मलेरिया जांच अभियान को तेज किया गया है. 12 जुलाई तक एक लाख से अधिक लोगों की जांच की जा चुकी है. पहले जहां पॉजिटिविटी रेट करीब 15 प्रतिशत था, वहीं अब यह घटकर एक प्रतिशत से भी नीचे पहुंच गया है. इससे साफ है कि लगातार अभियान का असर दिखने लगा है.
हर अस्पताल में उपलब्ध है जांच और दवा
डीसी ने कहा कि जिले के सभी सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में मलेरिया की जांच और दवा उपलब्ध है. स्वास्थ्य विभाग को पूरी तरह सतर्क रहने का निर्देश दिया गया है ताकि किसी भी मरीज को इलाज में परेशानी न हो.
चार लोगों की सेरेब्रल मलेरिया से मौत
उपायुक्त ने बताया कि अब तक चार लोगों की मौत सेरेब्रल मलेरिया के कारण हुई है. वहीं दो अन्य मरीजों की भी मौत हुई, लेकिन वे पहले से अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित थे और उनका इम्यून सिस्टम भी कमजोर था. उन्होंने कहा कि आम लोग इसे "ब्रेन मलेरिया" कहते हैं, जबकि चिकित्सा विज्ञान में इसका सही नाम "सेरेब्रल मलेरिया" है. यह मलेरिया का गंभीर चरण होता है.
समय पर इलाज से बच सकती है जान
डीसी ने कहा कि जिन मरीजों की मौत हुई, उनमें अधिकांश मामलों में अस्पताल पहुंचने में देरी हुई. यदि मरीज समय पर स्वास्थ्य केंद्र पहुंचते तो उनकी जान बचाई जा सकती थी. उन्होंने लोगों से अपील की कि बुखार, ठंड लगना या शरीर में कमजोरी जैसे लक्षण दिखते ही तुरंत जांच कराएं और इलाज शुरू करें.