Ranchi News : झारखंड हाईकोर्ट ने कांके स्थित स्टेट बेकन फैक्ट्री के सेवानिवृत्त सुपरवाइजर (मैकेनिकल) काशीनाथ गांगुली के वेतनमान विवाद में जनरल मैनेजर द्वारा जारी आदेश को रद्द कर दिया है। न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने कहा कि विभाग ने याचिकाकर्ता की आपत्तियों और दावों पर समुचित विचार नहीं किया और बिना ठोस कारण बताए उनका दावा खारिज कर दिया, जो कानून की कसौटी पर सही नहीं ठहरता।
हाईकोर्ट ने 4 मार्च 2021 को जारी जनरल मैनेजर के आदेश को निरस्त करते हुए मामले को दोबारा संबंधित प्राधिकारी के पास भेज दिया है। अदालत ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता के सभी बिंदुओं पर विचार करते हुए 12 सप्ताह के भीतर नया और कारणयुक्त आदेश पारित किया जाए। हालांकि, कोर्ट ने सीधे 6500-10500 रुपये का वेतनमान देने का आदेश नहीं दिया, बल्कि विभाग को कानून के अनुरूप नए सिरे से निर्णय लेने को कहा।
कोर्ट ने कहा- प्रशासनिक आदेश में स्पष्ट कारण होना जरूरी
मामले के अनुसार, काशीनाथ गांगुली ने वर्ष 1984 में सुपरवाइजर (मैकेनिकल) के रूप में सेवा शुरू की थी। समयबद्ध प्रोन्नति के बाद उन्हें पहले 5000-8000 रुपये और बाद में 6500-10500 रुपये का वेतनमान मिला। वर्ष 2007 में विभाग ने उनका वेतनमान घटाकर 5500-9000 रुपये कर दिया और अतिरिक्त भुगतान की वसूली का आदेश भी जारी कर दिया था।
हाईकोर्ट ने पाया कि 12 फरवरी 2021 को दिए गए विस्तृत प्रतिवेदन में उठाए गए तर्कों पर विभाग ने कोई विचार नहीं किया। अदालत ने इसे यांत्रिक और पूर्व निर्धारित निर्णय बताते हुए कहा कि प्रशासनिक आदेशों में स्पष्ट और तर्कसंगत कारण दर्ज होना अनिवार्य है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के Kranti Associates Pvt. Ltd. बनाम Masood Ahmed Khan मामले का हवाला देते हुए कहा कि बिना ठोस कारणों वाले प्रशासनिक आदेश कानून की दृष्टि में टिक नहीं सकते।