Himanshu Singh Murder Case: जमशेदपुर के बिष्टूपुर स्थित डीडी बार एंड कैफे के बाहर करणी सेना के नेता हिमांशु सिंह की हत्या मामले में रिमांड पर लिए गए आरोपियों से पूछताछ के दौरान एसआईटी को कई अहम जानकारियां मिली हैं. जांच एजेंसी अब हत्या की पूरी साजिश, हथियार उपलब्ध कराने वालों और फरारी के दौरान मदद करने वाले लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है.
घटना से पहले ही वाहन में रखे गए थे हथियार
सूत्रों के अनुसार, पूछताछ में विश्वनाथ मंडल उर्फ बोदरा ने बताया कि 27 जून की रात वारदात से पहले ही वाहन में चापड़ समेत अन्य हथियार रख दिए गए थे. एसआईटी अब यह पता लगाने में जुटी है कि हथियार किसने उपलब्ध कराए और उन्हें वाहन तक पहुंचाने में किन लोगों की भूमिका थी.
अवैध शराब भट्ठी में छिपा रहा बोदरा
जांच में यह भी सामने आया कि घटना के बाद बोदरा जमशेदपुर और सरायकेला-खरसावां सीमा से सटे जिलिंगगोड़ा और आसपास के इलाकों में छिपा रहा. फरारी के दौरान उसने एक अवैध शराब भट्ठी को अपना ठिकाना बनाया ताकि पुलिस की नजर से बच सके.
नए सिम कार्ड से करता रहा संपर्क
सूत्रों की माने तो एसआईटी की पूछताछ में पता चला कि फरारी के दौरान बोदरा ने अपना पुराना मोबाइल बंद कर दिया था. वह किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर जारी नए सिम कार्ड का इस्तेमाल कर अपने करीबी लोगों के संपर्क में था. पुलिस अब उस सिम के वास्तविक उपयोगकर्ता और जिसके नाम पर सिम जारी हुआ, उसकी भी तलाश कर रही है.
नीरज सिंह ने भी बदला मोबाइल नंबर
सूत्रों के अनुसार, जांच में यह भी सामने आया कि बार संचालक नीरज सिंह ने भी घटना के बाद नया मोबाइल नंबर ले लिया था. एसआईटी दोनों आरोपियों के नए नंबरों की कॉल डिटेल, लोकेशन और चैट रिकॉर्ड का विश्लेषण कर रही है, ताकि पूरे नेटवर्क और सहयोगियों तक पहुंचा जा सके.
बताया जा रहा है कि पूछताछ में राहुल दुबे की फरारी को लेकर भी अहम जानकारी मिली है. घटना के बाद राहुल पहले पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में अपने एक दोस्त के पास गया. वहां कुछ दिन रहने के बाद वह बिहार के मुजफ्फरपुर पहुंचा. आत्मसमर्पण से करीब दो दिन पहले ही वह वापस जमशेदपुर लौटा था. अब पुलिस यह पता लगा रही है कि फरारी के दौरान उसे किन लोगों ने शरण और अन्य मदद उपलब्ध कराई.
डिजिटल साक्ष्यों से होगा मिलान
सूत्र यह भी बताते है कि एसआईटी की माने तो पूछताछ में घटना से पहले और वारदात के बाद नीरज सिंह और बोदरा के बीच लगातार संपर्क होने की पुष्टि हुई है. अब आरोपियों के बयानों का मिलान सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्यों और बैंक लेनदेन से किया जा रहा है. जांच एजेंसी को उम्मीद है कि इन जानकारियों के आधार पर जल्द ही पूरे आपराधिक नेटवर्क और फरार आरोपियों तक पहुंचा जा सकेगा.