Jharkhand ATS: नक्सलवाद की चुनौती काफी हद तक कमजोर पड़ने के बाद अब झारखंड में सुरक्षा एजेंसियों का फोकस संदिग्ध आतंकी नेटवर्क और स्लीपर सेल पर है. हाल ही में ATS द्वारा 61 संदिग्धों की पहचान किए जाने के बाद यह मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है. पिछले करीब दो दशकों में राज्य के अलग-अलग जिलों से 24 से अधिक संदिग्धों की गिरफ्तारी हो चुकी है.
2002 से शुरू हुई जांच की कड़ी
झारखंड में आतंकी नेटवर्क की चर्चा वर्ष 2002 में कोलकाता के अमेरिकन सेंटर हमले की जांच के दौरान तेज हुई, जब जांच में हजारीबाग का नाम सामने आया. इसके बाद राज्य के कई संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा एजेंसियों ने निगरानी बढ़ा दी.
कई मामलों में सामने आए संदिग्ध मॉड्यूल
साल 2013 में पटना सीरियल ब्लास्ट की जांच के दौरान रांची के सिठियो और डोरंडा से जुड़े इंडियन मुजाहिदीन मॉड्यूल का खुलासा हुआ. इसके बाद वर्ष 2019 में बेड़ो से अलकायदा से जुड़े एक संदिग्ध को गिरफ्तार किया गया. वहीं 2023 और 2024 में NIA समेत अन्य एजेंसियों ने ISIS और AQIS से जुड़े मामलों में भी कार्रवाई की.
हाल के मामलों पर एजेंसियों की नजर
वर्ष 2025 में धनबाद से एक महिला सहित पांच संदिग्धों की गिरफ्तारी हुई थी. वहीं जून 2026 में रांची स्थित RSS प्रांत कार्यालय पर पेट्रोल बम फेंकने के मामले की जांच फिलहाल NIA कर रही है. सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि झारखंड की भौगोलिक स्थिति और ऑनलाइन कट्टरपंथी गतिविधियों को देखते हुए लगातार सतर्क रहना जरूरी है.