Seraikela: सरायकेला-खरसावां जिले के गम्हरिया प्रखंड के आसंगी गांव में सरकारी जमीन को झारखंड औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (जियाडा) के नाम हस्तांतरित किए जाने को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ गई है। शनिवार को वार्ड संख्या-25 स्थित निर्माणाधीन जगन्नाथ मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में ग्रामीणों की बैठक हुई। बैठक के बाद ग्रामीणों ने प्रेस वार्ता कर प्रशासन से जमीन हस्तांतरण का फैसला तत्काल वापस लेने की मांग की।
निर्माणाधीन मंदिर की जमीन बचाने की मांग
ग्रामीणों के प्रतिनिधि पितोवास प्रधान ने बताया कि मौजा आसंगी के खाता संख्या 342 और प्लॉट संख्या 276 की कुल 4.42 एकड़ अनाबाद सरकारी जमीन पर पिछले तीन वर्षों से स्थानीय लोगों के सहयोग से भव्य जगन्नाथ मंदिर का निर्माण कराया जा रहा है। उनका कहना है कि आसंगी के अलावा बोरगिडी, बनडीह, कृष्णापुर, पार्वतीपुर, ईटागढ़ और बासुड़दा सहित आसपास के छह गांवों के लोगों ने मंदिर निर्माण में आर्थिक और सामाजिक सहयोग दिया है। ऐसे में यह केवल एक गांव का नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र की आस्था का केंद्र बन चुका है।
2.22 एकड़ जमीन जियाडा को देने पर आपत्ति
ग्रामीणों का आरोप है कि इसी भूखंड की 2.22 एकड़ जमीन ग्रामसभा की सहमति के बिना जियाडा के नाम हस्तांतरित कर दी गई है। उनका कहना है कि इस भूमि पर आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र में कार्यरत महिलाओं के लिए 500 बेड का छात्रावास प्रस्तावित है। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि उन्हें औद्योगिक विकास से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन धार्मिक स्थल और उससे जुड़ी भूमि को किसी अन्य उद्देश्य के लिए उपयोग करने का विरोध किया जाएगा।
तालाब के प्रदूषित होने की जताई आशंका
बैठक में मौजूद ग्रामीणों ने प्रस्तावित छात्रावास से निकलने वाले सीवेज और अपशिष्ट के कारण क्षेत्र के एकमात्र बड़े तालाब के प्रदूषित होने की आशंका भी जताई। उनका कहना है कि करीब नौ एकड़ में फैला यह तालाब ग्रामीणों और पशुओं के लिए पानी का प्रमुख स्रोत है। साथ ही मनसा पूजा, काली पूजा और दुर्गा पूजा जैसी धार्मिक परंपराओं में मूर्ति विसर्जन भी इसी तालाब में किया जाता है। यदि उचित सीवेज व्यवस्था नहीं हुई तो इससे पर्यावरण और धार्मिक गतिविधियों दोनों पर असर पड़ेगा।
पुरानी जमीन अधिग्रहण का भी उठाया मुद्दा
ग्रामीणों ने कहा कि पूर्व में औद्योगिक विकास के लिए उनके पूर्वजों ने अपनी रैयती जमीनें दी थीं, लेकिन आज तक क्षेत्र को अपेक्षित बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल सकीं। उनका आरोप है कि सड़क, नाली और सीवेज जैसी मूलभूत समस्याएं अब भी बनी हुई हैं। इसी वजह से ग्रामीणों ने दोबारा जमीन हस्तांतरण का विरोध करते हुए कहा कि पहले पुराने वादों को पूरा किया जाए।
आंदोलन की चेतावनी
बैठक में मौजूद महिलाओं और पुरुषों ने एक स्वर में कहा कि मंदिर परिसर की भूमि पर केवल धार्मिक एवं सौंदर्यीकरण संबंधी कार्य ही होने चाहिए। यदि प्रशासन ने जमीन हस्तांतरण का फैसला वापस नहीं लिया तो ग्रामीण लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक आंदोलन शुरू करेंगे। खबर लिखे जाने तक इस मामले में जियाडा या जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। प्रशासन का पक्ष मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।