Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट ने मनरेगा से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार को कर्मचारियों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है. अदालत ने स्पष्ट कहा कि सरकार अपने कर्मचारियों को ठेकेदारों या आउटसोर्सिंग एजेंसियों की दया पर नहीं छोड़ सकती.
कोर्ट ने कहा कि लंबे समय से सरकारी योजनाओं में सेवा दे रहे कर्मचारियों को पर्याप्त कानूनी संरक्षण मिलना चाहिए. उनके अधिकारों और रोजगार की सुरक्षा सरकार की जिम्मेदारी है.
मनरेगा कंप्यूटर ऑपरेटरों ने दी थी हाईकोर्ट में चुनौती
यह मामला मनरेगा में कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटरों की ओर से दायर याचिका से जुड़ा है. याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वे कई वर्षों से योजना के तहत अपनी सेवाएं दे रहे हैं. उन्होंने अदालत को बताया कि अब उन्हें आउटसोर्सिंग कंपनियों के अधीन काम करने के लिए भेजा जा रहा है. इससे उनकी सेवा शर्तों और भविष्य पर असर पड़ सकता है.
आउटसोर्सिंग व्यवस्था पर कोर्ट ने जताई चिंता
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि आउटसोर्सिंग व्यवस्था में कर्मचारियों के शोषण की आशंका बनी रहती है. ऐसी व्यवस्था में नौकरी की सुरक्षा भी प्रभावित होती है और कर्मचारियों को नियमित कर्मियों जैसी सुविधाएं नहीं मिल पातीं. अदालत ने कहा कि वर्षों तक सरकार के लिए काम करने वाले कर्मचारियों के हितों की अनदेखी नहीं की जा सकती.
सरकार को पद सृजित कर समायोजन का निर्देश
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ताओं के लिए स्वीकृत पद सृजित किए जाएं और उन्हें उन पदों पर समायोजित किया जाए. अदालत ने यह भी कहा कि कर्मचारियों के हितों की रक्षा करना सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है. इसलिए इस दिशा में आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए.