Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट ने ट्रेंड ग्रेजुएट टीचर यानी TGT नियुक्ति मामले में राज्य सरकार को अहम निर्देश दिया है. कोर्ट ने कहा है कि प्रशासनिक कारणों से देर से नियुक्त हुए शिक्षकों को समान वरिष्ठता, अपग्रेड वेतनमान और वेतन वृद्धि का लाभ दिया जाए.
न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने अजय कुमार समेत आठ याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया. अदालत ने राज्य सरकार को 12 सप्ताह के भीतर सभी संबंधित लाभ देने का निर्देश दिया है.
2019 में हुई थी अन्य अभ्यर्थियों की नियुक्ति
मामला विज्ञापन संख्या 21/2016 के तहत हुई TGT भर्ती से जुड़ा है. याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वे उसी चयन प्रक्रिया में सफल हुए थे, जिसमें कई अभ्यर्थियों की नियुक्ति वर्ष 2019 में कर दी गई थी. हालांकि, प्रशासनिक कारणों से इन शिक्षकों की नियुक्ति रोक दी गई. बाद में अदालत के हस्तक्षेप के बाद वर्ष 2021 में उन्हें नियुक्ति मिली.
तीन साल की देरी के लिए शिक्षक जिम्मेदार नहीं
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता सुमित गडोदिया और अमृतांश वत्स ने अदालत में कहा कि नियुक्ति में देरी अभ्यर्थियों की गलती से नहीं हुई थी. ऐसे में उन्हें अपने साथ चयनित शिक्षकों से जूनियर मानना उचित नहीं होगा.
उन्होंने मांग की कि उनकी वरिष्ठता वर्ष 2019 से तय की जाए, ताकि उन्हें वेतन वृद्धि, अपग्रेड वेतनमान और अन्य सेवा लाभों में नुकसान नहीं उठाना पड़े. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट और झारखंड हाईकोर्ट के पूर्व फैसलों का भी हवाला दिया गया.
सरकार का विरोध नहीं आया काम
राज्य सरकार ने याचिकाओं का विरोध किया, लेकिन हाईकोर्ट ने शिक्षकों की दलीलों को स्वीकार कर लिया. अदालत ने स्पष्ट किया कि नियुक्ति में हुई देरी का असर शिक्षकों की सेवा शर्तों और वरिष्ठता पर नहीं पड़ना चाहिए.
आठ गैर-अनुसूचित जिलों के शिक्षकों को मिलेगा लाभ
यह फैसला पलामू, गढ़वा, हजारीबाग, कोडरमा, बोकारो, चतरा, धनबाद और गिरिडीह जैसे गैर-अनुसूचित जिलों के TGT शिक्षकों से जुड़ा है. आदेश के बाद इन जिलों में वर्ष 2021 में नियुक्त शिक्षकों को वर्ष 2019 से वरिष्ठता और उससे जुड़े वित्तीय लाभ मिलने का रास्ता साफ हो गया है.