RIMS Ranchi Cancer Surgery: रांची के रिम्स अस्पताल के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग ने दो गंभीर कैंसर मामलों में जटिल ऑपरेशन कर मरीजों को राहत दी है. एक मरीज के लिवर से बड़ा ट्यूमर निकाला गया, जबकि दूसरे मरीज के फेफड़े की मुख्य श्वासनली में बने दुर्लभ ट्यूमर का सफल इलाज किया गया.
पुरुलिया की महिला के लिवर से निकाला गया बड़ा ट्यूमर
पश्चिम बंगाल के पुरुलिया की 46 वर्षीय महिला लंबे समय से पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द और लिवर बढ़ने की परेशानी से जूझ रही थीं. जांच में उनके लिवर के बाएं हिस्से में हेपैटोसेल्युलर कार्सिनोमा यानी लिवर कैंसर का बड़ा ट्यूमर मिला.
डॉक्टरों ने लेफ्ट अपर लोबेक्टोमी सर्जरी कर ट्यूमर को बाहर निकाल दिया. ऑपरेशन के बाद महिला की हालत में सुधार है और उन्हें संतोषजनक रिकवरी के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है.
हजारीबाग की महिला के फेफड़े में मिला दुर्लभ ट्यूमर
दूसरा मामला हजारीबाग की 40 वर्षीय महिला का था. वह लगातार खांसी, खून आने, बार-बार बुखार, सांस फूलने और वजन घटने जैसी समस्याओं से परेशान थीं. जांच में पाया गया कि उनके बाएं मुख्य श्वासनली में पल्मोनरी कार्सिनॉयड ट्यूमर बना हुआ था. ट्यूमर के कारण फेफड़े का ऊपरी हिस्सा लगभग बंद हो चुका था. डॉक्टरों ने लेफ्ट अपर लोबेक्टोमी के जरिए ट्यूमर को सफलतापूर्वक निकाल दिया. मरीज की हालत स्थिर बताई जा रही है और रिकवरी जारी है.
विशेषज्ञ टीम ने किया दोनों ऑपरेशन
दोनों जटिल सर्जरी का नेतृत्व सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अजीत कुशवाहा और डॉ. रोहित झा ने किया. एनेस्थीसिया विभाग से डॉ. दीपाली शामिल रहीं. सर्जिकल टीम में डॉ. अभिषेक, डॉ. शास्वत, डॉ. तेश, डॉ. ईशांत, डॉ. बाला और डॉ. सहर ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
एक साल में कई तरह के कैंसर की सर्जरी
रिम्स के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के अनुसार, पिछले एक वर्ष में सिर और गर्दन के कैंसर के 180, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल कैंसर के 87, हेपेटोबिलियरी कैंसर के 33, स्त्री रोग संबंधी कैंसर के 102, स्तन कैंसर के 66 और यूरो-ऑन्कोलॉजिकल कैंसर के 27 ऑपरेशन किए गए हैं. विभाग का कहना है कि विशेषज्ञ डॉक्टरों और आधुनिक सर्जिकल सुविधाओं के कारण रिम्स पूर्वी भारत में कैंसर उपचार के प्रमुख केंद्र के रूप में तेजी से उभर रहा है.