DD Bar Murder Case: जमशेदपुर के बिष्टुपुर थाना क्षेत्र स्थित डीडी बार में बीते 27 जून की रात हुए चर्चित हत्याकांड और जानलेवा हमले के मामले में पुलिस की विशेष अनुसंधान दल (SIT) को बड़ी कामयाबी मिली है. आज बुधवार को पुलिस ने आधिकारिक रूप से प्रेस कॉन्फ्रेंस (पीसी) कर इनकी गिरफ्तारी का बड़ा खुलासा किया है. ताजा कार्रवाई में डीडी बार के मालिक व भाजपा नेता नीरज सिंह को राजस्थान के सीकर जिले (खाटू श्याम) से गिरफ्तार कर ट्रांजिट रिमांड पर जमशेदपुर लाया गया है, जबकि दो अन्य आरोपियों सुदर्शन मंडल उर्फ लाल्टू और राजेश मंडल को उड़ीसा के रायरंगपुर से दबोचा गया है. वहीं, मामले के मुख्य आरोपी विश्वनाथ मंडल उर्फ बोदरा ने भी आज कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया है.
एसआईटी की चौतरफा छापेमारी
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) के निर्देश पर गठित सहायक पुलिस अधीक्षक ऋषभ त्रिवेदी के नेतृत्व वाली एसआईटी ने तकनीकी साक्ष्यों, सीसीटीवी (CCTV) फुटेज और मानवीय सूचनाओं के आधार पर कई राज्यों में लगातार सघन छापेमारी अभियान चलाया था. इस पूरी कार्रवाई के दौरान पुलिस ने गिरफ्तार अपराधियों के पास से 3 मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं. पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, पकड़े गए बार मालिक नीरज सिंह का पूर्व में भी आपराधिक इतिहास रहा है और उनके खिलाफ वर्ष 2022 में कदमा थाने में मारपीट और एससी-एसटी (ST/SC) एक्ट के तहत मामला दर्ज हो चुका है.
अब तक कुल 9 आरोपी कानून के शिकंजे में
इस हाई-प्रोफाइल हत्याकांड में पुलिस अब तक कड़ा रुख अपनाते हुए अप्राथमिकी के 9 आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था. बार मालिक नीरज सिंह, सुदर्शन मंडल और राजेश मंडल की आधिकारिक गिरफ्तारी तथा मुख्य आरोपी विश्वनाथ मंडल के कोर्ट में सरेंडर करने के बाद अब इस खूनी खेल में शामिल लगभग सभी प्रमुख चेहरे पुलिस की गिरफ्त में आ चुके हैं.
क्या है पूरा डीडी बार हत्याकांड मामला?
यह पूरा मामला 27 जून 2026 की रात लगभग 11:30 बजे का है, जब बिष्टुपुर थाना क्षेत्र के डीडी बार के समीप कुछ अपराधियों ने धारदार हथियारों से हिमांशु सिंह और प्रत्युष सिंह पर ताबड़तोड़ कातिलाना हमला कर दिया था. इस चाकूबाजी में हिमांशु सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिनकी बाद में इलाज के दौरान मौत हो गई, जबकि प्रत्युष सिंह गंभीर रूप से जख्मी हो गए थे. घटना के बाद शहर में फैले तनाव और मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने एसआईटी का गठन किया था, जो लगातार देश के विभिन्न राज्यों में अपराधियों की धरपकड़ के लिए अभियान चला रही थी.