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  • 2026-07-03

Panchayati Raj Fund: 16वें वित्त आयोग से झारखंड की पंचायतों को मिलेंगे 14,231 करोड़, समय पर अनुदान की मांग

Panchayati Raj Fund: 16वें वित्त आयोग की अनुशंसाओं पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में झारखंड की ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने पंचायतों को मिलने वाली अनुदान राशि समय पर जारी करने की मांग उठाई. उन्होंने केंद्र सरकार से परफॉर्मेंस ग्रांट के मामलों में भी राज्यों की परिस्थितियों को देखते हुए उदार रुख अपनाने का आग्रह किया.
मंत्री ने कहा कि पंचायतों को अनुदान मिलने में देरी होने से गांवों में चलने वाली विकास योजनाएं प्रभावित होती हैं. इससे स्थानीय स्तर पर सेवा वितरण, आधारभूत संरचना और अन्य जरूरी कार्यों की रफ्तार धीमी पड़ जाती है.




पांच वर्षों में पंचायतों को मिलेंगे 14,231 करोड़ रुपये
दीपिका पांडेय सिंह ने बताया कि 16वें वित्त आयोग के तहत वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक झारखंड की पंचायतों को कुल 14,231 करोड़ रुपये मिलने का प्रावधान है. इसमें 11,385 करोड़ रुपये बेसिक ग्रांट और 2,846 करोड़ रुपये परफॉर्मेंस ग्रांट के रूप में शामिल हैं.

उन्होंने 15वें वित्त आयोग के तहत झारखंड को मिलने वाली बकाया राशि का भी जल्द भुगतान करने की मांग की. मंत्री ने कहा कि लंबित राशि जारी होने से पंचायत स्तर की योजनाओं को गति मिलेगी.

अप्रयुक्त राशि के उपयोग पर स्पष्ट निर्देश की मांग
कार्यशाला को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि 16वें वित्त आयोग की अनुशंसाएं झारखंड के पंचायती राज संस्थानों को मजबूत करने का बड़ा अवसर हैं. इससे ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद स्तर पर स्थानीय विकास योजनाओं तथा सेवा वितरण को बेहतर बनाया जा सकेगा.

उन्होंने पूर्व वित्त आयोग की अप्रयुक्त राशि के इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं होने पर चिंता जताई. उनका कहना था कि केंद्र सरकार को इस विषय पर जल्द स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि उपलब्ध राशि का उपयोग नियमों के अनुरूप किया जा सके.

पंचायत कर्मियों के लिए वित्तीय सहायता जारी रखने की मांग
मंत्री ने पंचायत स्तर पर कार्यरत कर्मियों के लिए पहले की तरह वित्तीय सहायता जारी रखने की भी मांग रखी. उन्होंने कहा कि यही कर्मचारी योजनाओं को गांवों तक पहुंचाने और उनके क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

उन्होंने कहा कि झारखंड जैसे राज्यों में पंचायतों की अपने स्रोतों से राजस्व जुटाने की क्षमता सीमित है. ऐसे में प्रदर्शन आधारित अनुदान तय करते समय राज्यों की वास्तविक परिस्थितियों को ध्यान में रखना जरूरी है. साथ ही पंचायतों की वित्तीय और तकनीकी क्षमता बढ़ाने के लिए पर्याप्त सहयोग दिया जाना चाहिए.

कार्यशाला में केंद्रीय पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, केंद्रीय राज्य मंत्री एस.पी. सिंह बघेल और झारखंड की पंचायती राज निदेशक बी. राजेश्वरी भी मौजूद रहीं.
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