Ramgarh News: रामगढ़ के कॉलेज रोड निवासी पर्यावरण प्रेमी एवं शिक्षक उपेंद्र पांडेय और उनकी पत्नी सोना पांडेय ने “पॉलिथीन दान अभियान, स्वच्छ समाज की पहचान” के जरिए पर्यावरण संरक्षण की अनूठी मिसाल पेश की है। बिना किसी सरकारी या गैर-सरकारी संस्था (NGO) के सहयोग के चल रहे इस अभियान में लोग घरों से प्लास्टिक कचरा देकर बदले में उनकी नर्सरी से तैयार पौधे निःशुल्क प्राप्त करते हैं। इसका उद्देश्य प्लास्टिक प्रदूषण कम करने के साथ-साथ हरियाली बढ़ाना है।
12 टन प्लास्टिक का पुनर्चक्रण, इको-ब्रिक्स से सड़क तक उपयोग
दंपति द्वारा एकत्रित प्लास्टिक का वैज्ञानिक तरीके से पुनः उपयोग किया जाता है। अच्छी गुणवत्ता वाली पॉलिथीन का इस्तेमाल पौधों के गमलों के रूप में किया जाता है, जबकि छोटे प्लास्टिक रैपर को प्लास्टिक बोतलों में भरकर इको-ब्रिक्स बनाए जाते हैं। शेष प्लास्टिक रामगढ़ नगर परिषद को सौंपा जाता है, जहां उसका पुनर्चक्रण कर सड़क निर्माण में उपयोग किया जाता है। अब तक वे 12 टन से अधिक प्लास्टिक कचरे का सफलतापूर्वक प्रबंधन कर चुके हैं।
एक लाख से अधिक पौधे बांटकर हरियाली का दिया संदेश
इस अभियान के माध्यम से उपेंद्र और सोना पांडेय अब तक एक लाख से अधिक पौधे निःशुल्क वितरित कर चुके हैं। उनका मानना है कि यदि हर व्यक्ति प्लास्टिक कचरे के उचित प्रबंधन और पौधारोपण की जिम्मेदारी निभाए, तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा बदलाव संभव है। उनकी यह पहल लोगों को स्वच्छता और हरित जीवनशैली अपनाने के लिए लगातार प्रेरित कर रही है।
“ग्रीन वॉरियर्स” सम्मान से सम्मानित, पूरे झारखंड के लिए बने प्रेरणा
पर्यावरण संरक्षण में उल्लेखनीय योगदान के लिए उपेंद्र पांडेय और सोना पांडेय को “ग्रीन वॉरियर्स” सम्मान से नवाजा जा चुका है। उनके इस अभिनव अभियान की सराहना झारखंड के राज्यपाल ने भी की है। आज उनकी पहल रामगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे झारखंड के लिए प्रेरणा बन चुकी है और यह संदेश दे रही है कि छोटे-छोटे प्रयास मिलकर स्वच्छ, हरित और सुरक्षित भविष्य का निर्माण कर सकते हैं।