Jharkhand Government Hospitals: झारखंड सरकार ने सरकारी अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता बेहतर करने और खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं. स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 5 करोड़ 39 लाख 30 हजार 750 रुपये का अतिरिक्त बजट स्वीकृत किया है.
सरकार ने स्पष्ट किया है कि अस्पतालों में जरूरी दवाओं की कमी नहीं होनी चाहिए. इसके लिए सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों को आवश्यक दवाओं का कम से कम 25 प्रतिशत बफर स्टॉक बनाए रखना होगा.
सांप और कुत्ता काटने की दवा हर समय उपलब्ध रखने का निर्देश
विभाग ने निर्देश दिया है कि सभी सरकारी अस्पतालों में सर्पदंश और कुत्ता काटने के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएं हर समय उपलब्ध रहनी चाहिए. मानसून और बदलते मौसम में बढ़ने वाली बीमारियों को देखते हुए मौसमी रोगों की दवाओं की खरीद को भी प्राथमिकता देने को कहा गया है.
स्वास्थ्य विभाग का उद्देश्य यह है कि मरीजों को इलाज के लिए बाहर से दवाएं खरीदने की मजबूरी न हो और आपात स्थिति में अस्पताल तुरंत इलाज शुरू कर सकें.
80 प्रतिशत शेल्फ लाइफ वाली दवाएं ही खरीदी जाएंगी
नई व्यवस्था के तहत खरीदी जाने वाली दवाओं की शेल्फ लाइफ कम से कम 80 प्रतिशत होना जरूरी होगा. इससे अस्पतालों में कम अवधि में एक्सपायर होने वाली दवाओं की आपूर्ति पर रोक लग सकेगी.
मरीजों की सुविधा और पारदर्शिता के लिए अस्पतालों को अपने यहां उपलब्ध दवाओं की सूची सूचना पट्ट पर प्रदर्शित करनी होगी. हर जिले में दवा उपलब्धता की निगरानी के लिए नोडल पदाधिकारी भी नियुक्त किया जाएगा.
E-Tender और GeM से होगी खरीद
सरकार ने दवाओं और अन्य आवश्यक सामग्री की खरीद केवल ई-टेंडर या GeM पोर्टल के माध्यम से करने का निर्देश दिया है. विभाग ने कहा है कि अनावश्यक खरीद, दवाओं के एक्सपायर होने या निर्धारित बजट से अधिक खर्च की स्थिति में संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी.
अतिरिक्त बजट में ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं, शहरी अस्पतालों और आयुष सेवाओं के लिए अलग-अलग राशि का प्रावधान किया गया है. सरकार को उम्मीद है कि नई व्यवस्था से सरकारी अस्पतालों में दवाओं की आपूर्ति नियमित होगी और मरीजों को समय पर उपचार मिल सकेगा.