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  • 2026-06-27

Jharkhand News: झारखंड में मॉनसून की रफ्तार धीमी, 60 फीसदी कम बारिश से खेती पर संकट; केंद्र ने बढ़ाई निगरानी

Jharkhand News: झारखंड में मॉनसून की सुस्त चाल ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. जून समाप्त होने को है, लेकिन पर्याप्त बारिश नहीं होने से खेत सूखने लगे हैं. धान की रोपाई और बुवाई का काम प्रभावित हो रहा है और कई इलाकों में खेतों में दरारें पड़ने लगी हैं.

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार जून महीने में राज्य में सामान्य 122.6 मिलीमीटर वर्षा होनी चाहिए थी, लेकिन अब तक केवल 49.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है. यानी झारखंड में सामान्य से 60 प्रतिशत कम वर्षा हुई है. इसी वजह से पूरा राज्य फिलहाल अल्प वर्षा (रेन डेफिसिट) की गंभीर स्थिति से गुजर रहा है.

इन जिलों में सबसे ज्यादा बारिश की कमी
  • मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक कई जिलों में हालात बेहद चिंताजनक हैं.
  • चतरा - 100% वर्षा की कमी 
  • गढ़वा - 99% कमी 
  • साहिबगंज – 98% कमी 
  • पलामू - 95% कमी 
  • लोहरदगा - 91% कमी 
इसके विपरीत राजधानी रांची राज्य का इकलौता जिला है, जहां सामान्य से 51 प्रतिशत अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई है.
राज्य के 16 जिलों में सामान्य से 60 प्रतिशत से अधिक कम बारिश हुई है. मिट्टी में पर्याप्त नमी नहीं होने के कारण किसान खेत तैयार नहीं कर पा रहे हैं, जिससे खरीफ फसलों के उत्पादन पर संकट गहराने लगा है.

देशभर में भी कमजोर पड़ा मॉनसून
कमजोर मॉनसून का असर सिर्फ झारखंड तक सीमित नहीं है. राष्ट्रीय स्तर पर भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में बताया कि चालू मानसून सीजन में देशभर में अब तक 43 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है.
स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने 315 जिलों को संभावित कृषि संकट वाले क्षेत्र के रूप में चिह्नित किया है.

315 जिलों को तीन श्रेणियों में बांटा गया
केंद्र सरकार ने सिंचाई सुविधाओं के आधार पर इन जिलों को तीन श्रेणियों में विभाजित किया है.
  • 111 जिले - अत्यधिक संवेदनशील (हाई प्रायोरिटी), जहां सिंचाई सुविधा 25 प्रतिशत से भी कम है. 
  • 76 जिले - मध्यम प्राथमिकता श्रेणी. 
  • 128 जिले - कम जोखिम वाली श्रेणी. 

कृषि मंत्रालय ने सभी प्रभावित राज्यों को जल संरक्षण अभियान तेज करने और जिला स्तर पर आकस्मिक कृषि योजना (कंटीजेंसी प्लान) तैयार करने के निर्देश दिए हैं, ताकि बारिश की कमी से किसानों को होने वाले नुकसान को कम किया जा सके.
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