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  • 2026-06-27

Jamshedpur News: नशामुक्ति अभियान के समापन पर समाहरणालय में सेमिनार, उपायुक्त बोले- नशे को ना कहें, जीवन को हां कहें

Jamshedpur News: पूर्वी सिंहभूम में 10 जून से 26 जून तक चले राज्यव्यापी नशामुक्ति जागरूकता अभियान का समापन शनिवार को समाहरणालय सभागार में आयोजित सेमिनार के साथ हुआ. कार्यक्रम में उपायुक्त राजीव रंजन, उप विकास आयुक्त, विभिन्न विभागों के अधिकारियों और विशेषज्ञों ने भाग लिया. वक्ताओं ने नशे की रोकथाम के लिए परिवार, समाज और संस्थानों की साझा जिम्मेदारी पर जोर दिया.
विशेषज्ञों ने नशे के कारण, इलाज और कानून की दी जानकारी
सेमिनार के दौरान मनोवैज्ञानिक, चिकित्सकीय और कानूनी विशेषज्ञों ने नशे से जुड़े अलग-अलग पहलुओं पर अपने विचार रखे. कार्यक्रम में नशे के दुष्प्रभावों पर आधारित एक लघु फिल्म भी दिखाई गई, ताकि लोगों को इसके सामाजिक और व्यक्तिगत नुकसान के प्रति जागरूक किया जा सके.

मनोवैज्ञानिक पुष्पा वाला महतो ने बताया कि नशे की लत मस्तिष्क में बनने वाले हैप्पी हार्मोन्स से जुड़ी प्रक्रिया है, जो धीरे-धीरे व्यक्ति की सोचने और सही निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित करती है. उन्होंने कहा कि युवाओं में जिज्ञासा, प्रयोग की प्रवृत्ति, साथियों का दबाव, मित्र समूह में स्वीकार्यता की चाह, पारिवारिक तनाव और अभिभावकों की निगरानी का अभाव नशे की लत के प्रमुख कारण बनते हैं.

डालसा की अधिवक्ता प्रीति मुर्मू ने एनडीपीएस अधिनियम 1985 के प्रमुख प्रावधानों, मादक पदार्थों से जुड़े अपराधों में दंड, जांच प्रक्रिया, पुलिस और जांच एजेंसियों की भूमिका की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि डालसा नशाग्रस्त लोगों को कानूनी सहायता, पुनर्वास और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से सहयोग भी उपलब्ध कराता है.


मनोचिकित्सक डॉ. महेश हेमब्रम ने कहा कि नशा भी एक बीमारी है, जिसका समय पर उपचार संभव है. उन्होंने डिटॉक्सिफिकेशन, डी-एडिक्शन और पुनर्वास की प्रक्रिया समझाते हुए कहा कि परिवार और समाज के सहयोग से प्रभावित व्यक्ति सामान्य जीवन में वापस लौट सकता है.


युवाओं को जागरूक करने पर दिया गया जोर
युवा संस्था की प्रतिनिधि बरनाली चक्रवर्ती ने कहा कि युवाओं को गलत आदतों के प्रति स्पष्ट रूप से ना कहना सीखना होगा. उन्होंने बताया कि संस्था यंग चेंज मेकर लीडर तैयार कर युवाओं को सामाजिक बदलाव की दिशा में जोड़ रही है. उनके अनुसार बच्चों के लिए सुरक्षित संवाद का माहौल तैयार करना और पंचायत प्रतिनिधियों, शिक्षकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा विभिन्न विभागों के समन्वित प्रयास नशामुक्त समाज बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे.


कॉमर्स एंड इंडस्ट्री से रवि राज ने भी अपने संस्थान की ओर से चलाए जा रहे जागरूकता कार्यक्रमों की जानकारी दी और प्रशासन के साथ मिलकर भविष्य में भी अभियान को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई.


उपायुक्त ने समाज से लिया नशामुक्ति का संकल्प
समापन सत्र को संबोधित करते हुए उपायुक्त राजीव रंजन ने कहा कि नशे की समस्या केवल स्वास्थ्य का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक वातावरण और पारिवारिक परिस्थितियों से भी जुड़ी हुई है. उन्होंने कहा कि बच्चों और युवाओं को सही मार्गदर्शन और सकारात्मक माहौल मिलना बेहद जरूरी है, क्योंकि यही उम्र उनके भविष्य की दिशा तय करती है.

उपायुक्त ने कहा कि आज के समय में नशा कुछ लोगों के लिए स्टेटस सिंबल बनता जा रहा है, जो चिंता का विषय है. उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि दुनिया के कई हिस्सों में नशे की समस्या समाज पर गंभीर प्रभाव डाल चुकी है. उन्होंने कहा कि नशे की चपेट में आए लोगों को केवल दंडित करने के बजाय उन्हें उपचार, सहयोग और बेहतर वातावरण उपलब्ध कराना जरूरी है.

उन्होंने लोगों से घर-घर से नशामुक्ति की शुरुआत करने की अपील करते हुए सभी को नशे से दूर रहने और समाज को नशामुक्त बनाने के अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया.
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