Hormuz Drone Attack: पश्चिम एशिया के बेहद अहम समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य में हालात फिर तनावपूर्ण हो गए हैं. ओमान के तट के पास एक मालवाहक जहाज पर ड्रोन हमले के बाद संयुक्त राष्ट्र की समुद्री एजेंसी ने अपना राहत और निकासी अभियान फिलहाल रोक दिया है. इससे समुद्र में मौजूद हजारों नाविकों की सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा हो गई है.
राहत अभियान पर लगा ब्रेक
बीते कुछ दिनों से संयुक्त राष्ट्र, ओमान और कई देशों की मदद से एक विशेष अभियान चलाया जा रहा था. इसका मकसद फारस की खाड़ी में लंबे समय से फंसे जहाजों और उन पर सवार नाविकों को सुरक्षित रास्ता उपलब्ध कराना था. योजना के तहत बड़ी संख्या में नाविकों को सुरक्षित क्षेत्र तक पहुंचाया जाना था, लेकिन ताजा हमले के बाद पूरी प्रक्रिया अस्थायी रूप से रोक दी गई है.
ड्रोन हमले ने बढ़ाई मुश्किलें
ओमान के नजदीक सिंगापुर के झंडे वाले मालवाहक जहाज एवर लवली पर ड्रोन हमला हुआ, जिससे जहाज के संचालन से जुड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया. राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी नाविक की मौत या गंभीर रूप से घायल होने की सूचना नहीं मिली. हालांकि सुरक्षा जोखिम को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन ने निकासी अभियान आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया. जानकारी के मुताबिक इस क्षेत्र में करीब 20 हजार नाविक मौजूद हैं, जिनमें लगभग 11 हजार लोगों को सुरक्षित निकालने की तैयारी की गई थी.
ईरान की चेतावनी से और बढ़ा तनाव
घटना से पहले ही ईरान ने साफ कर दिया था कि उसकी मंजूरी के बिना किसी वैकल्पिक समुद्री मार्ग का इस्तेमाल नहीं किया जाए. हमले के बाद ईरान की नई पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी ने भी कहा कि आधिकारिक मार्ग छोड़कर दूसरे रास्ते से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा की जिम्मेदारी उसकी नहीं होगी. संयुक्त राष्ट्र ने भी स्पष्ट किया है कि जब तक सभी जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो जाती, तब तक निकासी अभियान दोबारा शुरू नहीं किया जाएगा. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात जल्द नहीं सुधरे तो इसका असर वैश्विक तेल आपूर्ति, समुद्री व्यापार और ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है.