Adra Nakshatra 2026: भीषण गर्मी के बीच 22 जून की रात से आद्रा नक्षत्र का आरंभ होने जा रहा है. ज्योतिष और कृषि परंपराओं में इसे बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. माना जाता है कि इसके आगमन के साथ मानसून की सक्रियता बढ़ती है और खेती के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनने लगती हैं.
6 जुलाई तक रहेगा प्रभाव, खेती के लिए माना जाता है शुभ
मृगशिरा नक्षत्र की समाप्ति के साथ सोमवार, 22 जून की रात 8:27 बजे सूर्य आद्रा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे. यह नक्षत्र 6 जुलाई की रात 10:02 बजे तक प्रभावी रहेगा, जिसके बाद पुनर्वसु नक्षत्र की शुरुआत होगी. ग्रामीण क्षेत्रों में आद्रा नक्षत्र को वर्षा और हरियाली का संकेत माना जाता है. इसी अवधि में किसान धान, मक्का, दलहन और सब्जियों की खेती की तैयारियां तेज कर देते हैं. पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार शुरुआती तीन दिनों में बीजारोपण और कुछ कृषि कार्यों से बचने की परंपरा भी रही है.
भोजपुर में दल पूड़ी, खीर और आम के साथ मनाया जाता है उत्सव
बिहार के भोजपुर जिले में आद्रा नक्षत्र का आगमन एक विशेष सांस्कृतिक अवसर माना जाता है. इस दौरान घरों में चना दाल की पूड़ी, खीर, आम और कई पारंपरिक व्यंजन तैयार किए जाते हैं. पहले इन व्यंजनों को भगवान को अर्पित किया जाता है और इसके बाद परिवार, रिश्तेदारों और पड़ोसियों के साथ प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है. यह परंपरा ग्रामीण सामाजिक जीवन और सामूहिक उत्सव का भी अहम हिस्सा मानी जाती है.
ज्योतिष शास्त्र में आद्रा नक्षत्र का है विशेष स्थान
ज्योतिष शास्त्र में आद्रा को 27 नक्षत्रों में छठा स्थान प्राप्त है. इसके देवता रुद्र माने जाते हैं, जिन्हें भगवान शिव का उग्र स्वरूप माना जाता है, जबकि इसका स्वामी ग्रह राहु है. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस नक्षत्र का संबंध तेज हवाओं, बादलों और वर्षा से जोड़ा जाता है. इसी वजह से इसे मौसम परिवर्तन, प्रकृति के नवजीवन और कृषि चक्र की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है.