Current News : अयोध्या के प्रसिद्ध राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए चंदे और चढ़ावे की चोरी का मामला इन दिनों देश भर में चर्चा का विषय बना हुआ है। इस पूरे प्रकरण में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की बड़ी लापरवाही और सुरक्षा इंतजामों में गंभीर खामियां सामने आई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, एसबीआई ने राम मंदिर परिसर के दानपात्रों से निकलने वाली नकदी और मूल्यवान वस्तुओं की गिनती की जिम्मेदारी खुद संभालने के बजाय वाराणसी की एक निजी आउटसोर्सिंग एजेंसी को सौंप दी थी।
इस लचर व्यवस्था का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि नोटों की गिनती के काम में लगे कर्मचारियों (टैलर्स) के लिए कोई तय ड्रेस कोड (जैसे बिना जेब वाली पोशाक) निर्धारित नहीं था, और न ही गिनती कक्ष में प्रवेश व निकास के समय उनकी कोई सख्त या पुख्ता सुरक्षा जांच की जाती थी। सुरक्षा की इस भारी चूक का फायदा उठाकर आरोपी कर्मचारी सीसीटीवी कैमरों के ठीक सामने खड़े होकर भी चढ़ावे और नकदी की चोरी को आसानी से अंजाम दे देते थे।
एसबीआई ने वाराणसी की निजी एजेंसी को सौंपा था काम
इस संवेदनशील मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा एक 3-सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया, जिसने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंप दी है। एसआईटी की जांच और आरोपियों की निशानदेही पर अब तक लगभग ₹2 करोड़ की नकदी और एक आरोपी के घर से सोना भी बरामद किया जा चुका है। इस घोटाले की आंच मंदिर ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों तक पहुंचती दिख रही है, जहां राम जन्मभूमि क्षेत्र तीर्थ ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा समेत करीब 25 लोगों से घंटों पूछताछ की गई है और उनके खिलाफ बड़ी कार्रवाई होने की संभावना है। पूछताछ के दायरे में आए सभी लोगों को फिलहाल अयोध्या न छोड़ने की चेतावनी दी गई है।
एसआईटी ने सीएम योगी को सौंपी प्रारंभिक रिपोर्ट
दूसरी ओर, इस पूरे मामले ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है, जिसके तहत घोटाले की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से जांच कराने और पूरे चंदे का भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) से ऑडिट कराने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका भी दायर की गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी अयोध्या दौरे के दौरान कड़ा रुख अपनाते हुए साफ कर दिया है कि आस्था के इस केंद्र में चोरी करने वाले अपराधियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।