NEET UG Re-Exam Scam: सरकार की तमाम सख्ती के बावजूद प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी करने वाले गिरोह सक्रिय हैं। बिहार के लखीसराय में नीट-यूजी पुनर्परीक्षा के दौरान एक बड़े सॉल्वर गैंग का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस ने मेडिकल छात्रों और बायोमेट्रिक कंपनी के कर्मचारियों समेत 30 लोगों को गिरफ्तार किया है। इस खुलासे ने एक बार फिर मेडिकल प्रवेश परीक्षा की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
30 से 40 लाख में तय होती थी डील
पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरोह असली अभ्यर्थियों की जगह डमी उम्मीदवारों को बैठाने के लिए 30 से 40 लाख रुपये तक की डील करता था। गुप्त सूचना मिलने के बाद पुलिस ने राजकीय उच्च विद्यालय हसनपुर, केआरके हायर सेकेंडरी स्कूल और केंद्रीय विद्यालय समेत कई परीक्षा केंद्रों पर एक साथ छापेमारी कर पूरे नेटवर्क का खुलासा किया।
मेडिकल कॉलेजों के छात्र भी शामिल
गिरफ्तार आरोपियों में गिरोह का सरगना भी शामिल है। पुलिस के अनुसार पीएमसीएच, गयाजी मेडिकल कॉलेज, एम्स रायबरेली और बीएचयू से जुड़े कई मेडिकल छात्र इस रैकेट का हिस्सा पाए गए हैं। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि गिरोह सुनियोजित तरीके से डमी उम्मीदवारों के जरिए परीक्षा में सेंध लगाने की कोशिश कर रहा था।
बायोमेट्रिक कंपनी के 14 कर्मचारी गिरफ्त में
मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू बायोमेट्रिक सत्यापन से जुड़े 14 कर्मचारियों की गिरफ्तारी है। पुलिस को आशंका है कि अभ्यर्थियों के फिंगरप्रिंट और पहचान सत्यापन प्रक्रिया में मिलीभगत कर डमी उम्मीदवारों को परीक्षा केंद्रों में प्रवेश दिलाने का प्रयास किया गया। इस एंगल से भी जांच तेज कर दी गई है।
मोबाइल-दस्तावेज बरामद, जांच जारी
लखीसराय की पुलिस अधीक्षक प्रेरणा ने बताया कि आरोपियों के पास से मोबाइल फोन, दस्तावेज और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य बरामद हुए हैं। पुलिस अब इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेजों की जांच कर नेटवर्क के दायरे का पता लगा रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि गिरोह के तार अन्य राज्यों तक फैले हैं या नहीं और इससे पहले भी ऐसी घटनाओं में इसकी भूमिका रही है या नहीं।