Bengal Politics: पश्चिम बंगाल में भ्रष्टाचार, जबरन वसूली और जमीन कब्जाने के आरोपों को लेकर पुलिस की कार्रवाई तेज होती नजर आ रही है. रविवार को तृणमूल कांग्रेस के दो नेताओं की गिरफ्तारी ने राज्य की राजनीति में हलचल बढ़ा दी. कोलकाता नगर निगम के पार्षद बप्पादित्य दासगुप्ता और पश्चिम मिदनापुर के पूर्व विधायक सुजॉय हाजरा को अलग अलग मामलों में गिरफ्तार किया गया है. दोनों नेताओं पर जबरन वसूली, भ्रष्टाचार और अन्य गंभीर आरोप लगे हैं. पुलिस अब इन मामलों की गहराई से जांच कर रही है.
पार्षद की गिरफ्तारी के बाद थाने के बाहर लगा लोगों का जमावड़ा
कोलकाता नगर निगम के वार्ड नंबर 101 के पार्षद बप्पादित्य दासगुप्ता को पटुली थाना पुलिस ने जबरन वसूली के आरोप में हिरासत में लिया. गिरफ्तारी के बाद जब उन्हें थाने लाया गया तो इलाके का माहौल अचानक गरमा गया.
स्थानीय लोगों की बड़ी संख्या थाने के बाहर जमा हो गई. कई लोगों ने पुलिस वाहन को घेर लिया और पार्षद के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी. मौके पर कुछ समय के लिए तनावपूर्ण स्थिति भी बन गई. बप्पादित्य दासगुप्ता केवल पार्षद ही नहीं हैं, बल्कि कोलकाता नगर निगम में तृणमूल कांग्रेस पार्षदों के चीफ व्हिप की अहम जिम्मेदारी भी संभाल रहे थे.
बीजेपी से शुरू हुआ राजनीतिक सफर, TMC में बढ़ता गया कद
बप्पादित्य दासगुप्ता का राजनीतिक सफर कई उतार चढ़ावों से भरा रहा है. उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत भारतीय जनता पार्टी से की थी. बाद में वर्ष 2010 में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस का दामन थाम लिया. 2015 में पहली बार पार्षद बनने के बाद उन्होंने पार्टी संगठन में अपनी मजबूत पहचान बनाई और धीरे धीरे महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां हासिल कीं.
हालांकि उनका नाम पहले भी कई विवादों में सामने आ चुका है. 2021 विधानसभा चुनाव के बाद उन पर भाजपा समर्थकों के घरों में तोड़फोड़ और हिंसा फैलाने के आरोप लगे थे. इसके अलावा स्थानीय स्तर पर कई लोगों ने मकान निर्माण की अनुमति दिलाने के नाम पर पैसे लेने और प्रभाव का इस्तेमाल करने जैसी शिकायतें भी की थीं.
रेलवे स्टेशन से भागने की कोशिश के दौरान पकड़े गए पूर्व विधायक
एक अन्य बड़ी कार्रवाई में पश्चिम मिदनापुर जिले की मेदिनीपुर विधानसभा सीट से पूर्व विधायक रहे सुजॉय हाजरा को पुलिस ने शनिवार रात गिरफ्तार कर लिया. पुलिस को सूचना मिली थी कि वह खड़गपुर रेलवे स्टेशन के जरिए कहीं निकलने की तैयारी में हैं.
सूचना मिलते ही पुलिस ने स्टेशन और आसपास के इलाके में निगरानी बढ़ाई और आखिरकार उन्हें हिरासत में ले लिया. बताया जा रहा है कि सुजॉय हाजरा पिछले महीने की 4 तारीख से फरार चल रहे थे. उनकी तलाश में लगातार कई जगहों पर छापेमारी की जा रही थी, लेकिन वह पुलिस की पकड़ से बाहर थे.
जमीन कब्जाने और वसूली जैसे मामलों में चल रही थी तलाश
पश्चिम मिदनापुर की पुलिस अधीक्षक पापिया सुल्ताना ने गिरफ्तारी की पुष्टि करते हुए बताया कि सुजॉय हाजरा के खिलाफ जमीन कब्जाने, जबरन वसूली और अन्य गंभीर आरोपों से जुड़े कई मामले दर्ज हैं.
पुलिस के अनुसार उन्हें पहले जांच में सहयोग करने के लिए सालबनी थाने में बुलाया गया था, लेकिन वह निर्धारित समय पर पेश नहीं हुए. इसके बाद से वह लगातार पुलिस की नजरों से बचने की कोशिश कर रहे थे. आखिरकार खड़गपुर में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया.
दोनों मामलों की कड़ियां जोड़ने में जुटी पुलिस
पुलिस अब दोनों नेताओं से अलग अलग मामलों में पूछताछ कर रही है. जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इन मामलों में और कौन कौन लोग शामिल हो सकते हैं. साथ ही आरोपों से जुड़े आर्थिक और राजनीतिक पहलुओं की भी पड़ताल की जा रही है.
सूत्रों के मुताबिक आने वाले दिनों में जांच का दायरा और बढ़ सकता है. यदि पूछताछ में नए तथ्य सामने आते हैं तो कुछ और लोगों पर भी कार्रवाई हो सकती है.
सत्ताधारी दल के लिए बढ़ी राजनीतिक चुनौती
एक ही दिन में पार्टी के दो नेताओं की गिरफ्तारी ने तृणमूल कांग्रेस के लिए राजनीतिक असहजता बढ़ा दी है. विपक्ष इन मामलों को लेकर लगातार सरकार और पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठा रहा है. वहीं राजनीतिक गलियारों में इस बात की भी चर्चा तेज है कि आने वाले दिनों में इन मामलों का असर राज्य की राजनीति पर देखने को मिल सकता है.