Ranchi News : औद्योगिक विकास और आर्थिक लाभ की होड़ में कई कंपनियां और संस्थान सुरक्षा मानकों को नजरअंदाज कर रहे हैं। लागत कम करने और मुनाफा बढ़ाने की मानसिकता के कारण सुरक्षा उपायों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता, जिसका खामियाजा कर्मचारियों और आम लोगों को भुगतना पड़ता है। हाल के वर्षों में विभिन्न औद्योगिक दुर्घटनाओं, सड़क हादसों और निर्माण परियोजनाओं में सामने आई खामियों ने इस चिंता को और गहरा किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कई परियोजनाओं में सुरक्षा संबंधी प्रावधानों को खर्च कम करने के लिए कमजोर किया जाता है। सड़क निर्माण से लेकर औद्योगिक इकाइयों तक, कई मामलों में सुरक्षा मानकों के अनुपालन को प्राथमिकता नहीं मिलती। लागत घटाने के लिए सुरक्षा सुविधाओं में कटौती करना एक खतरनाक प्रवृत्ति बनती जा रही है, जिसका सीधा असर लोगों की सुरक्षा पर पड़ता है।
सुरक्षा ऑडिट, नियमित निरीक्षण और रखरखाव की अनदेखी के कारण दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है। कई मामलों में हादसों के बाद ही कमियों पर ध्यान दिया जाता है, जबकि समय रहते उचित कदम उठाने से बड़े नुकसान को रोका जा सकता है।
जवाबदेही और निगरानी की जरूरत
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल नियम बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके प्रभावी पालन की भी आवश्यकता है। कमजोर निगरानी, जवाबदेही की कमी और सुरक्षा को अतिरिक्त खर्च मानने की सोच दुर्घटनाओं की बड़ी वजह बनती है। जब तक सुरक्षा को विकास का अभिन्न हिस्सा नहीं माना जाएगा, तब तक इस तरह की घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाना मुश्किल होगा।
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि उद्योगों, निर्माण परियोजनाओं और सार्वजनिक ढांचे में ‘सेफ्टी फर्स्ट’ की संस्कृति विकसित करना समय की मांग है। इससे न केवल लोगों की जान बचाई जा सकेगी, बल्कि दीर्घकालिक आर्थिक नुकसान और सामाजिक प्रभावों को भी कम किया जा सकेगा।