Ranchi News : झारखंड में जल जीवन मिशन की प्रगति को लेकर CAG की रिपोर्ट में कई गंभीर कमियां सामने आई हैं। रिपोर्ट के अनुसार राज्य में स्वीकृत 98,067 योजनाओं में दिसंबर 2024 तक सिर्फ 27,294 योजनाएं पूरी हो सकीं। यानी करीब 72 फीसदी योजनाएं अब भी अधूरी हैं। इनमें कई योजनाएं दो साल से अधिक समय से लंबित हैं।
98 हजार से ज्यादा योजनाएं स्वीकृत, खर्च हुए 11,468 करोड़
जल जीवन मिशन के तहत राज्य सरकार ने पांच वर्षों में 98,067 योजनाओं को मंजूरी दी थी। इनकी अनुमानित लागत 24,360.91 करोड़ रुपये थी। योजना के लिए 11,690.09 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए, जिसमें केंद्र और राज्य की हिस्सेदारी के साथ बैंक ब्याज और अन्य स्रोतों की राशि शामिल थी। उपलब्ध राशि में से 11,468.63 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
55 फीसदी ग्रामीण घरों तक पहुंचा नल का पानी
जल जीवन मिशन की शुरुआत अगस्त 2019 में हुई थी। उस समय झारखंड के ग्रामीण इलाकों में करीब 52.27 लाख घर थे, जिनमें सिर्फ 7 फीसदी घरों में नल से पानी की सुविधा उपलब्ध थी।
बाद में ग्रामीण घरों की संख्या बढ़कर करीब 67.25 लाख हो गई और इन सभी घरों तक नल का पानी पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया। मार्च 2025 तक करीब 34.31 लाख घरों में नल से पानी पहुंचाया जा सका, जो कुल लक्ष्य का लगभग 55 फीसदी है।
योजना से सिर्फ 19 से 40 फीसदी लाभुक संतुष्ट, 3,339 राजस्व गांव योजना से बाहर
CAG ने योजना का लाभ लेने वाले लोगों का सर्वे भी किया। अलग-अलग क्षेत्रों में सिर्फ 19 से 40 फीसदी लाभुकों ने ही योजना से संतुष्ट होने की बात कही। इससे साफ है कि नल कनेक्शन उपलब्ध कराने के बावजूद पानी की आपूर्ति और योजना के संचालन को लेकर बड़ी संख्या में लोग संतुष्ट नहीं हैं।
CAG की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जल जीवन मिशन के नियमों के तहत जनगणना में दर्ज सभी राजस्व गांवों को योजना में शामिल किया जाना था। इसके बावजूद झारखंड में 3,339 राजस्व गांवों को योजना के दायरे में शामिल नहीं किया गया।
ठेकेदारों को 27.13 करोड़ रुपये का अनुचित लाभ
जांच में ठेकेदारों को अनुचित आर्थिक लाभ दिए जाने का मामला भी सामने आया। CAG के अनुसार करीब 27.13 करोड़ रुपये का अनुचित लाभ ठेकेदारों को दिया गया।
इसका एक उदाहरण चाईबासा प्रमंडल की जगन्नाथपुर जलापूर्ति योजना है। यह योजना अप्रैल 2023 में शुरू हुई थी। इसकी लागत 118.60 करोड़ रुपये थी और इसे जुलाई 2025 तक पूरा किया जाना था।
नियमों के अनुसार DI पाइप की आपूर्ति और उसे बिछाने के बाद ठेकेदार को 85 फीसदी राशि का भुगतान किया जाना था। लेकिन इस योजना में ठेकेदार को 100 फीसदी राशि का भुगतान कर दिया गया। CAG ने जल जीवन मिशन की स्थिति की जांच के लिए धनबाद, पूर्वी सिंहभूम, हजारीबाग, खूंटी, कोडरमा और पश्चिमी सिंहभूम जिलों को चुना था। इन जिलों के 12 प्रखंडों और 26 गांवों में योजनाओं की जांच की गई। रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि योजना के तहत बड़ी संख्या में स्वीकृतियां और खर्च होने के बावजूद योजनाओं को समय पर पूरा करने और ग्रामीण परिवारों तक नियमित नल का पानी पहुंचाने में अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।