Ranchi News : राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में आउटसोर्स भर्ती प्रक्रिया को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। शासी परिषद के सदस्य संजय सेठ के प्रतिनिधि द्वारा रिम्स निदेशक को सौंपे गए शिकायत पत्र में दावा किया गया है कि नौकरी दिलाने के नाम पर कई अभ्यर्थियों से अवैध रूप से बड़ी रकम वसूली गई है। मामले की जांच भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) से कराने की मांग की गई है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आउटसोर्स व्यवस्था के तहत नियुक्त किए गए 75 से अधिक कर्मियों से बहाली के बदले एक लाख से डेढ़ लाख रुपये तक लिए गए। शिकायतकर्ता का कहना है कि नौकरी की उम्मीद में कई युवाओं ने कर्ज लिया, जमीन बेची और गहने तक गिरवी रख दिए।
नर्सिंग स्टाफ से लेकर लैब टेक्नीशियन तक की नियुक्तियों पर सवाल
शिकायत में एम-एस सामंता सिक्योरिटी एंड इंटेलिजेंस सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड पर भी सवाल उठाए गए हैं, जिसे रिम्स में मानव बल उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी दी गई है। आरोप है कि नर्सिंग स्टाफ, कंप्यूटर ऑपरेटर, वार्ड बाय, लैब टेक्नीशियन और पैरामेडिकल स्टाफ समेत कई पदों पर नियुक्तियों में अनियमितताएं हुई हैं।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि बेरोजगारी का फायदा उठाकर युवाओं का आर्थिक शोषण किया गया और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता का पालन नहीं किया गया।
रिम्स निदेशक ने गठित की जांच समिति, रिपोर्ट का इंतजार
मामले को गंभीरता से लेते हुए रिम्स निदेशक डॉ. राजकुमार ने जांच समिति का गठन कर दिया है। शिकायतकर्ता ने नियुक्ति प्रक्रिया, चयन सूची और कथित वित्तीय लेन-देन की विस्तृत जांच कराने तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
हालांकि अब तक आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। रिम्स प्रशासन की ओर से गठित समिति मामले की जांच कर रही है और उसकी रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। भर्ती प्रक्रिया को लेकर उठे इन सवालों ने संस्थान की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर बहस छेड़ दी है।