Jamshedpur News: जमशेदपुर समेत पूरे झारखंड में साइबर ठगी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. इसी बीच एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने लोगों की चिंता बढ़ा दी है. रांची के तुपुदाना निवासी मनोज लकड़ा साइबर अपराधियों के जाल में फंस गए और उनके बैंक खाते से 40 हजार रुपये निकाल लिए गए. हैरानी की बात यह है कि ठगों ने किसी ओटीपी या कॉल का सहारा नहीं लिया, बल्कि एक APK फाइल के जरिए पूरी वारदात को अंजाम दिया.
WhatsApp पर भेजी गई APK फाइल बनी ठगी का जरिया
जानकारी के मुताबिक मनोज लकड़ा के WhatsApp नंबर पर एक APK फाइल भेजी गई थी. जैसे ही उन्होंने उस फाइल को अपने मोबाइल में डाउनलोड किया, साइबर अपराधियों को उनके फोन तक पहुंच मिल गई.
बताया जा रहा है कि APK फाइल डाउनलोड होने के साथ ही बैंक ऑफ इंडिया के आधिकारिक एप जैसा दिखने वाला एक फर्जी एप भी मोबाइल में इंस्टॉल हो गया. इसके बाद अपराधियों ने खाते से 40 हजार रुपये की निकासी कर ली.
जब तक पीड़ित को पूरे मामले की जानकारी होती, तब तक रकम खाते से निकल चुकी थी.
शिकायत के बाद शुरू हुई कार्रवाई
घटना का पता चलने के बाद मनोज लकड़ा ने तुरंत संबंधित ग्रीवांस सेल में शिकायत दर्ज कराई. वहां से उन्हें राशि की रिकवरी का प्रयास किए जाने का आश्वासन दिया गया.
इसके बाद उन्होंने जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित साइबर थाना में भी लिखित शिकायत सौंपी. शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और साइबर अपराधियों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है.
साइबर पुलिस ने लोगों को किया अलर्ट
इस घटना के बाद साइबर पुलिस ने आम लोगों से सतर्क रहने की अपील की है. पुलिस का कहना है कि किसी भी अनजान नंबर या संदिग्ध स्रोत से भेजी गई APK फाइल को बिना जांचे डाउनलोड नहीं करें.
अधिकारी बताते हैं कि साइबर अपराधी APK फाइल के माध्यम से मोबाइल की जानकारी हासिल कर लोगों के बैंक खातों तक पहुंच बना रहे हैं. इसके बाद खाते से पैसे निकालने जैसी घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है.
कैसे बचें इस तरह की साइबर ठगी से
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी APK फाइल को डाउनलोड करने से पहले उसके स्रोत की जांच जरूर करें. केवल Google Play Store या अधिकृत प्लेटफॉर्म से ही एप डाउनलोड करें. किसी अनजान लिंक, फाइल या मैसेज पर बिना पुष्टि किए क्लिक करने से बचें. यदि मोबाइल में कोई संदिग्ध एप इंस्टॉल हो जाए या बैंक खाते से अनधिकृत लेनदेन दिखाई दे, तो तुरंत बैंक, साइबर हेल्पलाइन और नजदीकी साइबर थाना से संपर्क करें.