Ranchi News: रांची के मेन रोड पर स्थित सेंटाविटा अस्पताल एक बार फिर विवादों के घेरे में है. मोरहाबादी की रहने वाली और झारखंड विधानसभा में निम्नवर्गीय सचिवालय सहायक के पद पर कार्यरत अंजना तिवारी की इलाज के दौरान संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई. परिजनों ने बताया कि अंजना को पित्त की थैली (गॉलब्लैडर) में पथरी की शिकायत थी, जिसके ऑपरेशन के लिए उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था. यह पूरी सर्जरी डॉ. राजेश कुमार मारू की देखरेख में होनी थी. परिवार का सीधा आरोप है कि डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ ने इलाज में घोर लापरवाही बरती, जिसके कारण ऑपरेशन के बाद अंजना की हालत सुधरने के बजाय लगातार बिगड़ती चली गई और उन्होंने दम तोड़ दिया.
इंसाफ के लिए कोतवाली थाने पहुंचे परिजन
अंजना की अचानक हुई मौत से दुखी और आक्रोशित परिजनों ने इसे सीधे तौर पर हत्या का मामला करार दिया है. उनका कहना है कि अगर डॉक्टर समय रहते सही कदम उठाते, तो उनकी जान बच सकती थी. घटना के तुरंत बाद पीड़ित परिवार ने सेंटाविटा अस्पताल प्रबंधन और संबंधित डॉक्टर के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. उन्होंने इस लापरवाही के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने और दोषियों को जेल भेजने की मांग को लेकर कोतवाली थाना में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई है. पुलिस ने परिजनों की अर्जी स्वीकार करते हुए मामले की छानबीन शुरू कर दी है.
विधानसभा परिसर में शव रखकर धरने पर बैठे साथी कर्मचारी, न्याय की मांग को लेकर अड़े
इस दुखद घटना की खबर जैसे ही झारखंड विधानसभा के गलियारों में पहुंची, वहां के कर्मचारियों में भारी आक्रोश फैल गया. मंगलवार को मामले ने उस समय बेहद गंभीर रूप ले लिया जब दर्जनों की संख्या में विधानसभा कर्मी अंजना तिवारी का शव लेकर सीधे विधानसभा परिसर पहुंच गए. गुस्साए कर्मचारियों ने परिसर के भीतर ही शव को रखकर जोरदार प्रदर्शन किया और धरने पर बैठ गए. आंदोलन कर रहे कर्मियों ने दोटूक कहा कि जब तक इस पूरे मामले की निष्पक्ष उच्च स्तरीय जांच नहीं होती और लापरवाह डॉक्टर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं की जाती, वे अपना विरोध प्रदर्शन बंद नहीं करेंगे.
अस्पताल और पुलिस प्रशासन के रवैये पर उठे गंभीर सवाल, मामले ने पकड़ा राजनीतिक तूल
इस घटना के बाद से राजधानी में निजी अस्पतालों की कार्यशैली और सुरक्षा मानकों को लेकर जनता के बीच तीखी बहस छिड़ गई है. पीड़ित परिवार और प्रदर्शनकारी कर्मियों के कड़े रुख के बाद अब स्थानीय पुलिस प्रशासन पर भी त्वरित कार्रवाई करने का भारी दबाव है. कोतवाली थाना पुलिस का कहना है कि वे मामले के हर पहलू को गहराई से देख रहे हैं. इधर, सचिवालय कर्मियों के इस बड़े विरोध प्रदर्शन के बाद यह पूरा मामला अब प्रशासनिक के साथ-साथ राजनीतिक स्तर पर भी काफी गरमा गया है, जिससे प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है.