Jharkhand News: नीट परीक्षा में धांधली और पेपर लीक के आरोपों को लेकर देशभर में विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है. झारखंड की राजधानी रांची स्थित कांग्रेस कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की सचिव अम्बा प्रसाद ने केंद्र सरकार और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी यानी NTA पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि देश के लाखों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है और शिक्षा व्यवस्था धीरे धीरे माफियाओं के प्रभाव में चली गई है.
छात्रों की मेहनत पर सवाल, NTA की विश्वसनीयता पर उठे गंभीर आरोप
प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए अम्बा प्रसाद ने कहा कि जिस NTA को देश की प्रमुख परीक्षाओं को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से कराने की जिम्मेदारी दी गई थी, वही संस्था आज लगातार सवालों के घेरे में है. उन्होंने आरोप लगाया कि बार बार सामने आ रही गड़बड़ियों ने परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को पूरी तरह कमजोर कर दिया है. उन्होंने कहा कि गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के छात्र वर्षों तक कठिन मेहनत करते हैं और अपने भविष्य के लिए तैयारी करते हैं. लेकिन पेपर लीक जैसी घटनाएं उनकी पूरी मेहनत पर पानी फेर देती हैं. कांग्रेस का कहना है कि NTA अब अपनी साख खो चुका है और परीक्षा व्यवस्था पर भरोसा लगातार टूट रहा है.
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और स्वतंत्र जांच की मांग
कांग्रेस ने इस पूरे मामले में केंद्र सरकार से कड़ी जवाबदेही की मांग की है. अम्बा प्रसाद ने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तुरंत अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए. उन्होंने कहा कि जब इतनी बड़ी परीक्षाओं में लगातार अनियमितताओं के आरोप लग रहे हैं तो सरकार को जिम्मेदारी लेनी होगी. कांग्रेस ने यह भी मांग की है कि NEET पेपर लीक मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में एक स्वतंत्र समिति से कराई जाए ताकि पूरी तरह निष्पक्ष जांच हो सके और सच्चाई सामने आ सके.
छात्रों के हित में कांग्रेस का आंदोलन जारी रखने का ऐलान
इस प्रेस वार्ता में मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा और प्रवक्ता सोनाल शांति भी मौजूद रहे. कांग्रेस नेताओं ने कहा कि पार्टी इस मुद्दे पर चुप नहीं बैठेगी और छात्रों के हक की लड़ाई सड़क से लेकर संसद तक लड़ी जाएगी. कांग्रेस ने कहा कि NTA की पूरी कार्यप्रणाली की गहन समीक्षा होनी चाहिए और परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी और मजबूत बनाया जाना चाहिए ताकि भविष्य में छात्रों के साथ किसी भी तरह का अन्याय न हो.