Jharkhand News: झारखंड में हाल ही में रिलीज हुई नागपुरी फिल्म सेरेंग को लेकर विवाद गहराता जा रहा है. आदिवासी समाज के कई संगठनों ने फिल्म पर गंभीर आरोप लगाए हैं. केंद्रीय सरना समिति का कहना है कि फिल्म में आदिवासी संस्कृति, धार्मिक पहचान और समाज की छवि को गलत तरीके से पेश किया गया है. मामले को लेकर समिति ने राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग तक शिकायत पहुंचाई है और सख्त कार्रवाई की मांग की है.
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग तक पहुंचा मामला
केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष बबलू मुंडा के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा से मुलाकात की. इस दौरान आयोग को एक ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें फिल्म से जुड़े कई आपत्तिजनक पहलुओं का जिक्र किया गया. समिति ने आरोप लगाया कि फिल्म में आदिवासी समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली सामग्री दिखाई गई है. प्रतिनिधिमंडल ने आयोग से मांग की कि मामले की गंभीरता को देखते हुए फिल्म से जुड़े लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए.
फिल्म में धर्म परिवर्तन और लव जिहाद को बढ़ावा देने का आरोप
केंद्रीय सरना समिति का आरोप है कि फिल्म में एक मुस्लिम युवक और मुंडा जनजाति की लड़की के बीच प्रेम संबंध दिखाया गया है. समिति के अनुसार, कहानी में लड़की का धर्म परिवर्तन कर शादी करते हुए दिखाया गया है, जिसे वे लव जिहाद और जबरन धर्मांतरण को बढ़ावा देने वाला बताते हैं. समिति का कहना है कि इस तरह की कहानी समाज में गलत संदेश फैलाती है और आदिवासी समुदाय की सामाजिक संवेदनाओं को प्रभावित करती है.
उरांव और मुंडा समाज पर अभद्र टिप्पणी का भी आरोप
फिल्म को लेकर विवाद केवल धर्म परिवर्तन के मुद्दे तक सीमित नहीं है. केंद्रीय सरना समिति ने यह भी आरोप लगाया कि फिल्म में उरांव और मुंडा जनजाति के खिलाफ कथित तौर पर जातिसूचक और अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया है. समिति के नेताओं का कहना है कि इस तरह की भाषा आदिवासी समाज की छवि खराब करने की कोशिश है और इससे समुदाय की गरिमा को ठेस पहुंची है.
सरना झंडे के कथित अपमान पर बढ़ा आक्रोश
आदिवासी समाज की धार्मिक पहचान माने जाने वाले सरना झंडे को लेकर भी फिल्म पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं. समिति का आरोप है कि फिल्म में सरना झंडे को अपमानजनक तरीके से दिखाया गया है, जिसे आदिवासी समाज किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगा. केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष बबलू मुंडा ने कहा कि यह सिर्फ एक फिल्म का मामला नहीं है, बल्कि आदिवासी संस्कृति और धार्मिक पहचान से जुड़ा मुद्दा है. उन्होंने कहा कि झारखंड की अस्मिता और आदिवासी गौरव के साथ किसी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
नागपुरी एल्बमों में बढ़ती अश्लीलता पर भी उठाई आवाज
समिति ने आयोग को दिए ज्ञापन में नागपुरी गानों और एल्बमों में बढ़ती अश्लीलता पर भी चिंता जताई. उनका कहना है कि क्षेत्रीय संगीत और संस्कृति में लगातार अश्लील कंटेंट बढ़ रहा है, जिससे झारखंड की सांस्कृतिक पहचान प्रभावित हो रही है. समिति ने मांग की कि नागपुरी एल्बमों और गानों में अश्लीलता पर रोक लगाने के लिए भी ठोस कदम उठाए जाएं ताकि स्थानीय संस्कृति की गरिमा बनी रहे.
कई प्रमुख पदाधिकारी रहे प्रतिनिधिमंडल में शामिल
डॉ. आशा लकड़ा से मुलाकात करने वाले प्रतिनिधिमंडल में केंद्रीय सरना समिति के कई वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे. इनमें कार्यकारी अध्यक्ष शोभा कच्छप, प्रधान महासचिव अशोक मुंडा, महासचिव महादेव टोप्पो और सदस्य प्रदीप मुंडा शामिल थे. अब इस पूरे मामले पर सबकी नजर राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है. देखना होगा कि आयोग फिल्म सेरेंग और उससे जुड़े आरोपों को लेकर क्या फैसला लेता है.