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  • 2026-05-22

Bihar Big News: बिहार में शराबबंदी की खुली पोल, सचिवालय के बाद अब सीएम हाउस के पास मिलीं बोतलें, भड़के विपक्ष ने कहा:- खोल दीजिए शराब

Bihar Big News: बिहार में पूर्ण शराबबंदी के दावों के बीच कानून व्यवस्था को ठेंगा दिखाने वाली एक बेहद हैरान करने वाली तस्वीर सामने आई है. राजधानी पटना में सचिवालय के अंदर दफ्तर के गेट पर शराब की बोतलें मिलने के बाद, अब मुख्यमंत्री आवास (5 देशरत्न मार्ग) के बिल्कुल पास से भारी मात्रा में शराब की खाली बोतलें बरामद की गई हैं. इस हाई-प्रोफाइल इलाके में शराब की बोतलें मिलने के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है. सचिवालय थानाध्यक्ष गौतम कुमार ने बताया कि स्थानीय लोगों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने जांच के दौरान मौके से 10 खाली और 2 टूटी हुई शराब की बोतलें जब्त की हैं. पुलिस अब इस अति-सुरक्षित क्षेत्र के आसपास लगे सीसीटीवी (CCTV) फुटेज को खंगाल रही है ताकि आरोपियों की पहचान कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सके.

विपक्ष का सरकार पर तीखा हमला, बड़े लोगों को बचाने का आरोप
मुख्यमंत्री आवास और सचिवालय जैसे सबसे सुरक्षित माने जाने वाले इलाकों में शराब की बोतलें मिलने पर अब बिहार की सियासत पूरी तरह गर्मा गई है. विपक्ष ने इसे सरकार के मुंह पर एक करारा तमाचा बताया है. विधायक आई पी गुप्ता ने सरकार पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि अगर किसी गरीब के घर से शराब मिलती है, तो पुलिस उसे तुरंत गिरफ्तार कर जेल भेज देती है. इसके विपरीत, शासन के नाक के नीचे बड़े-बड़े अधिकारी और रसूखदार नेता खुलेआम शराब का सेवन कर रहे हैं, लेकिन पुलिस उन तक पहुंचने की हिम्मत नहीं जुटा पाती. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के अपने कार्यालय और आवास के पास शराब मिलना उनकी प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है.

शराबबंदी हटाने की मांग, राजस्व और युवाओं की बर्बादी का दिया हवाला
मामले पर कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए विधायक आई पी गुप्ता ने सरकार से बिहार में शराबबंदी को तुरंत खत्म करने और शराब की बिक्री दोबारा शुरू करने की मांग की है. उन्होंने दलील दी कि शराबबंदी हटाने से राज्य को दो बड़े फायदे होंगे; पहला यह कि बिहार के राजस्व (सरकारी खजाने) में भारी बढ़ोतरी होगी, और दूसरा यह कि शराब न मिलने के कारण आज का युवा वर्ग जिस घातक सूखे नशे (ड्रग्स) की गिरफ्त में जाकर अपनी जिंदगी नर्क बना रहा है, उस पर लगाम लगेगी. उन्होंने आरोप लगाया कि शराबबंदी के नाम पर युवाओं को बर्बाद करने के लिए एक बड़ी साजिश के तहत घर-घर तक सूखा नशा पहुंचाया जा रहा है.

सूखे नशे की तस्करी को बताया राजनीतिक और सामाजिक साजिश
विधायक ने देश और राज्य के मौजूदा राजनीतिक हालातों पर कटाक्ष करते हुए सूखे नशे (ड्राई ड्रग्स) के कारोबार को एक गहरी राजनीतिक साजिश करार दिया. उन्होंने कहा कि जब कोई शासक जनता को धर्म और छद्म राष्ट्रभक्ति का फर्जी नशा पिलाकर सत्ता तक पहुंचता है, तो उसे अच्छी तरह पता होता है कि इस राजनैतिक नशे की मियाद सिर्फ 10 वर्षों की होती है. 10 साल बाद जब जनता का यह नशा उतरेगा, तो वह खुद सरकार से अपने अधिकारों और विफलताओं पर सवाल पूछने लगेगी. विपक्ष का आरोप है कि इसी सवाल से बचने और युवाओं की सोचने-समझने की शक्ति को कुचलने के लिए देश के कोने-कोने तक सोची-समझी रणनीति के तहत ड्रग्स का जाल फैलाया जा रहा है.
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