National News: मुंबई के बांद्रा रेलवे स्टेशन के पास स्थित गरीब नगर इलाके में पश्चिमी रेलवे ने अब तक का सबसे बड़ा अतिक्रमण हटाओ अभियान शुरू कर दिया है. बॉम्बे हाई कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद मंगलवार से शुरू हुई यह कार्रवाई बुधवार को भी जारी रही, लेकिन दूसरे दिन हालात हिंसक हो गए और इलाके में तनाव फैल गया.
भारी पुलिस बल के बीच चलाया जा रहा है अतिक्रमण हटाने का अभियान
रेलवे प्रशासन ने इस अभियान को लेकर इलाके में भारी सुरक्षा व्यवस्था तैनात की है. अधिकारियों के मुताबिक करीब 400 पुलिसकर्मी, 400 जीआरपी और आरपीएफ जवानों के साथ लगभग 200 रेलवे अधिकारी और कर्मचारियों को मौके पर लगाया गया है. कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए गरीब नगर की ओर जाने वाले कई रास्तों को भी बंद कर दिया गया.
बुधवार को अवैध धार्मिक ढांचे को हटाने के दौरान भड़की हिंसा
अतिक्रमण हटाने के दूसरे दिन हालात उस समय बिगड़ गए जब बांद्रा ईस्ट स्काईवॉक के पास बने एक अवैध धार्मिक ढांचे को हटाने की कार्रवाई की जा रही थी. इस दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने विरोध शुरू कर दिया और देखते ही देखते पथराव होने लगा. स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा. इस झड़प में कुल 13 लोग घायल हुए हैं जिनमें 7 पुलिसकर्मी और 6 प्रदर्शनकारी शामिल बताए जा रहे हैं.
पत्थर और बर्तन फेंके गए, 10 लोगों को हिरासत में लिया गया
पुलिस के अनुसार प्रदर्शनकारियों ने तोड़फोड़ करने पहुंची टीम पर पत्थर, बर्तन और अन्य सामान फेंके. इसके बाद पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए कार्रवाई की. मामले में 10 लोगों को हिरासत में लिया गया है. पुलिस ने दंगा फैलाने और सरकारी कर्मचारियों पर हमला करने के आरोप में एफआईआर भी दर्ज की है. अतिरिक्त पुलिस आयुक्त अभिनव देशमुख ने कहा है कि हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
600 करोड़ रुपये की रेलवे जमीन खाली कराने की कार्रवाई
रेलवे द्वारा चलाया जा रहा यह अभियान करीब 5,200 वर्ग मीटर जमीन को खाली कराने के लिए किया जा रहा है. अधिकारियों के मुताबिक इस जमीन की अनुमानित कीमत लगभग 600 करोड़ रुपये है. रेलवे का कहना है कि अतिक्रमण रेलवे ट्रैक और ओवरहेड इलेक्ट्रिक इक्विपमेंट के खंभों तक बेहद खतरनाक तरीके से फैल चुका था, जिससे ट्रेन संचालन और सुरक्षा पर गंभीर खतरा पैदा हो रहा था.
रेलवे विस्तार और सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता
रिपोर्ट के मुताबिक इलाके में कई बहुमंजिला झुग्गी संरचनाएं इतनी ऊंची हो चुकी थीं कि वे पास के पैदल पुलों की ऊंचाई तक पहुंच गई थीं. इससे भविष्य में रेलवे विस्तार और ट्रेनों की सुरक्षित आवाजाही को लेकर चिंता बढ़ रही थी.
अधिकारियों का कहना है कि अतिक्रमण हटने के बाद बांद्रा स्टेशन के आसपास रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर का बड़ा विस्तार किया जाएगा. यह जमीन रणनीतिक रूप से भी काफी अहम मानी जा रही है क्योंकि यह रेलवे कॉरिडोर और बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स जैसे बड़े कारोबारी इलाके के पास स्थित है.
2017 से चल रही थी कानूनी प्रक्रिया, कोर्ट के आदेश के बाद तेज हुई कार्रवाई
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक यह कार्रवाई अचानक नहीं की गई है. सार्वजनिक परिसर अधिनियम के तहत इसकी कानूनी प्रक्रिया साल 2017 से चल रही थी. उसी दौरान बेदखली आदेश भी जारी किए गए थे, लेकिन मामला लंबे समय तक बॉम्बे हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में लंबित रहा. आखिरकार इस साल 29 अप्रैल को बॉम्बे हाई कोर्ट से पश्चिमी रेलवे को अतिक्रमण हटाने की अनुमति मिली. संयुक्त सर्वेक्षण में योग्य पाए गए करीब 100 ढांचों को सुरक्षित रखा गया है, जबकि लगभग 500 अवैध झुग्गियों को हटाने की कार्रवाई की जा रही है.
ईद से पहले कार्रवाई पर स्थानीय लोगों में नाराजगी
इलाके के कई लोगों का कहना है कि वे दशकों से गरीब नगर में रह रहे हैं. उनके पास मकान कर के दस्तावेज, पानी के टैक्स की रसीदें और बीएमसी द्वारा जारी अधिकृत बिजली कनेक्शन भी मौजूद हैं. स्थानीय निवासियों ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि यह कार्रवाई ईद से ठीक पहले शुरू की गई. लोगों का कहना है कि इलाके में त्योहार की तैयारियां चल रही थीं और ऐसे समय में तोड़फोड़ अभियान शुरू होने से परिवारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.