Chaibasa News: चाईबासा के को-ऑपरेटिव बैंक में खाताधारकों के साथ बड़े फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। बैंक प्रबंधन की कथित मिलीभगत से खातों से अवैध निकासी के दो अलग-अलग मामलों का खुलासा हुआ है। पीड़ितों ने करीब दो साल तक बैंक के चक्कर लगाए, लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अब मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के आदेश पर सदर थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई है।
मुआवजा राशि हड़पने का आरोप
पहला मामला तांतनगर थाना क्षेत्र के ईलीगाढ़ा गांव निवासी अमृतलाल कालुंडिया से जुड़ा है। आरोप है कि उनके पिता स्वर्गीय मानसिंह कालुंडिया को स्वर्णरेखा परियोजना में जमीन के बदले मिली मुआवजा राशि फर्जी तरीके से निकाल ली गई। शिकायत के अनुसार गांव के ही दिनेश कालुंडिया, मिरेन कालुंडिया और सुजीत कालुंडिया ने खुद को पुत्र बताकर फर्जी खाता खुलवाया और बैंक कर्मियों की मिलीभगत से पूरी राशि निकाल ली।
बुजुर्ग महिला की पेंशन तक नहीं छोड़ी
दूसरा मामला मुफस्सिल थाना क्षेत्र के मडकमहातु गांव की बुजुर्ग जेमा कुई का है। आरोप है कि उनके खाते से जमा राशि और वृद्धावस्था पेंशन का पैसा बिना जानकारी के निकाल लिया गया। जून 2022 से नवंबर 2024 के बीच करीब 45 हजार रुपये की अवैध निकासी हुई। शिकायत के बाद सी. बोदरा नामक व्यक्ति द्वारा खाते में 7 हजार रुपये जमा कराए जाने की भी जानकारी सामने आई है।
बैंक प्रबंधन पर मिलीभगत के गंभीर आरोप
दोनों मामलों में शाखा प्रबंधक राबिया भगत, कैशियर और अन्य बैंक कर्मियों पर मिलीभगत के आरोप लगे हैं। पीड़ितों का कहना है कि बैंक अधिकारियों को कई बार शिकायत देने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। लगातार टालमटोल के बाद परेशान होकर दोनों पक्षों ने कोर्ट में शिकायतवाद दायर किया।
कोर्ट के आदेश पर FIR, पुलिस जांच शुरू
मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के निर्देश के बाद सदर थाना पुलिस ने दोनों मामलों में FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब पुलिस बैंक दस्तावेजों, खातों और निकासी प्रक्रिया की जांच कर रही है। मामले के सामने आने के बाद बैंकिंग व्यवस्था और खाताधारकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।