News 26 Exclusive: जमशेदपुर के भुइयांडीह स्थित अंतरराज्यीय बस स्टैंड से बिहार, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पश्चिम बंगाल और ओडिशा जैसे पड़ोसी राज्यों के लिए रोजाना सैकड़ों बसें खुलती हैं. इसके अलावा राजधानी रांची समेत झारखंड के विभिन्न जिलों के लिए भी यहीं से हजारों यात्री सफर तय करते हैं. बताया जा रहा है कि जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (JNAC) इस व्यस्त बस अड्डे से हर दिन लगभग 1 लाख रुपये का भारी-भरकम राजस्व वसूलती है, लेकिन इसके बावजूद यात्रियों को दी जाने वाली जनसुविधाओं की स्थिति यहां पूरी तरह शून्य बनी हुई है.
शौचालयों में गंदगी का अंबार, खुले में जाने को मजबूर लोग
इस महत्वपूर्ण बस स्टैंड पर पुरुष, महिला और दिव्यांग यात्रियों के लिए सुलभ शौचालय की व्यवस्था बद से बदत्तर हो गई है. शौचालयों में इस कदर गंदगी पसरी है कि लोग भीतर जाने से कतराते हैं, जिसके कारण पुरुष यात्री खुले में ही पेशाब करने को मजबूर हैं. इस कुव्यवस्था से पूरे परिसर में गंदगी और भीषण दुर्गंध फैली रहती है. पुरुषों की तुलना में महिला यात्रियों, बुजुर्गों और दिव्यांगजनों को इस गंभीर समस्या के कारण बेहद शर्मनाक और असुविधाजनक परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है.
जर्जर वेटिंग हॉल, धूप और जलजमाव की दोहरी मार
बस अड्डे पर बना इकलौता वेटिंग हॉल पूरी तरह जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है, जहां यात्रियों के बैठने का कोई सुचारू इंतजाम नहीं है. कड़कड़ाती और चिलचिलाती धूप में यात्रियों को खुले आसमान के नीचे बसों का इंतजार करना पड़ता है. वहीं, मौसम बदलते ही जरा-सी बारिश होने पर पूरे बस स्टैंड परिसर में जलजमाव हो जाता है, जिससे कीचड़ और गंदगी के बीच यात्रियों को अपने भारी-भरकम सामान के साथ बसों में चढ़ना और उतरना पड़ता है.
इस एकमात्र अड्डे पर जेएनएसी के अधिकारियों का कोई ध्यान नहीं है. रोजाना हजारों की संख्या में सफर करने वाले आम मुसाफिरों की परेशानी से बेखबर अधिकारी सिर्फ राजस्व समेटने में व्यस्त हैं. प्रशासनिक संवेदनहीनता का आलम यह है कि करोड़ों के टर्नओवर वाले इस पड़ाव पर मूलभूत सुधार तक नहीं किए जा रहे हैं, जो भविष्य में शहर के लिए प्रस्तावित अन्य बड़े बुनियादी ढांचे और परिवहन व्यवस्थाओं की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवालिया निशान खड़े करता है.