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  • 2026-05-17

El Nino Alert: मई में ही सक्रिय हो सकता है अल नीनो, मॉनसून पर मंडराया बड़ा खतरा, NOAA और IMD की चेतावनी, देश में सूखे जैसी स्थिति की आशंका

El Nino Alert: भारत में इस साल सामान्य से कम बारिश की आशंका के बीच मॉनसून को लेकर चिंता और बढ़ गई है। अमेरिकी मौसम एजेंसी NOAA के ताजा अनुमान के मुताबिक, प्रशांत महासागर का तापमान तेजी से बढ़ रहा है, जिससे अल नीनो मई-जुलाई के दौरान ही सक्रिय हो सकता है। पिछले महीने जहां इसके बनने की संभावना 61 प्रतिशत थी, वहीं अब यह बढ़कर 82 प्रतिशत पहुंच गई है। अंतरराष्ट्रीय मौसम एजेंसियों का मानना है कि इस बार अल नीनो पूरे मॉनसून सीजन पर असर डाल सकता है।

IMD ने जताई चिंता, सूखे का बढ़ा खतरा
India Meteorological Department के प्रमुख Mritunjay Mohapatra ने कहा कि पहले अनुमान में मॉनसून के दूसरे हिस्से में अल नीनो के उभरने की संभावना मानी गई थी, लेकिन अब इसके समय से पहले आने के संकेत मिल रहे हैं। इसका सीधा असर देश की बारिश पर पड़ सकता है और कई हिस्सों में सूखे जैसी स्थिति पैदा होने का खतरा बढ़ सकता है। IMD ने इस साल मॉनसून को लंबी अवधि के औसत का 92 प्रतिशत रहने का अनुमान दिया है, जो 2007 के बाद सबसे कम आंका गया पूर्वानुमान माना जा रहा है। एजेंसी अगले हफ्ते अपना दूसरा मॉनसून पूर्वानुमान जारी करेगी।

क्या है अल नीनो और भारत पर इसका असर?
अल नीनो प्रशांत महासागर में बनने वाली एक प्राकृतिक जलवायु घटना है, जिसमें समुद्र का पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है। इसके कारण हवा के पैटर्न बदल जाते हैं और दुनियाभर में बारिश का चक्र प्रभावित होता है। कहीं सूखा पड़ता है तो कहीं भारी बारिश और बाढ़ जैसी स्थितियां बनती हैं। भारत में भी इसका गहरा असर देखने को मिलता है। 1980 के बाद से करीब 70 प्रतिशत अल नीनो वर्षों में देश में मॉनसून सामान्य से कमजोर रहा है, जिससे खेती और जल संकट की स्थिति गंभीर हुई है।

दुनिया भर में मौसम बिगड़ने की चेतावनी, “सुपर अल नीनो” का खतरा
ECMWF ने पहले ही चेतावनी दी थी कि अल नीनो मई में सक्रिय हो सकता है। अधिकांश वैश्विक मौसम मॉडल इसे इतिहास की सबसे भीषण घटनाओं में से एक मान रहे हैं। वहीं अमेरिकी जलवायु पूर्वानुमान केंद्र Climate Prediction Center के अनुसार, इसके “तीव्र” (Strong) रूप लेने की संभावना 66 प्रतिशत है। नवंबर से जनवरी के बीच इसके “सुपर अल नीनो” में बदलने की आशंका भी 37 प्रतिशत तक जताई गई है, जिससे दुनियाभर के मौसम और कृषि पर बड़ा असर पड़ सकता है।
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