Sugar Export Ban: देश में बढ़ती घरेलू मांग और वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए चीनी निर्यात पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार यह प्रतिबंध 30 सितंबर 2026 या अगले आदेश तक लागू रहेगा। इस बैन में व्हाइट शुगर, रॉ शुगर और रिफाइंड शुगर तीनों शामिल हैं।
घरेलू बाजार में कीमतें काबू में रखने की कोशिश
सरकार का मानना है कि चीनी की घरेलू सप्लाई बनाए रखना इस समय सबसे बड़ी प्राथमिकता है। लगातार बढ़ती कीमतों और बाजार में दबाव को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने निर्यात नीति को “प्रतिबंधित” से बदलकर “निषिद्ध” कर दिया है, ताकि देश के अंदर चीनी की उपलब्धता बनी रहे और आम लोगों पर महंगाई का असर कम हो।
कुछ निर्यात को मिली राहत
हालांकि सरकार ने कुछ विशेष श्रेणियों को इस प्रतिबंध से बाहर रखा है। EU और USA को CXL और TRQ कोटे के तहत होने वाला निर्यात, एडवांस ऑथराइजेशन स्कीम के अंतर्गत भेजी जाने वाली चीनी और अन्य देशों की खाद्य सुरक्षा जरूरतों के लिए सरकार-से-सरकार शिपमेंट जारी रहेंगे। इसके अलावा जो खेप पहले से निर्यात प्रक्रिया में हैं, उन्हें भी इस रोक से छूट दी गई है।
उत्पादन घटने से बदला सरकार का फैसला
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक और निर्यातक देश है, जबकि पहले स्थान पर ब्राजील है। शुरुआत में सरकार को उम्मीद थी कि इस बार उत्पादन घरेलू मांग से अधिक रहेगा, इसलिए चीनी मिलों को 15 लाख मीट्रिक टन निर्यात की अनुमति दी गई थी। लेकिन गन्ने की पैदावार अनुमान से कम रहने के कारण सरकार ने घरेलू आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए यह सख्त फैसला लिया।
वैश्विक बाजार में बढ़ सकती हैं चीनी की कीमतें
सरकार के इस फैसले का असर अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी देखने को मिल सकता है। प्रमुख न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक भारत द्वारा निर्यात रोकने से वैश्विक स्तर पर चीनी की कीमतों में उछाल आ सकता है। इसका फायदा ब्राजील और थाईलैंड जैसे बड़े निर्यातक देशों को मिल सकता है, जो एशिया और अफ्रीका के देशों में अपनी चीनी की सप्लाई बढ़ा सकते हैं।