Jharkhand News: झारखंड हाई कोर्ट ने राज्य पुलिस बल में सब इंस्पेक्टर (दरोगा) से इंस्पेक्टर पद पर होने वाली पदोन्नति की प्रक्रिया पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है. जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने उत्तम तिवारी और अन्य द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया. कोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार और अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. अब इस मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई 2026 को निर्धारित की गई है, तब तक विभाग में किसी भी प्रकार की प्रोन्नति प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाएगी.
नियुक्ति विज्ञापन और वरीयता सूची का कानूनी विवाद
प्रार्थियों का पक्ष रखते हुए अधिवक्ता मनोज टंडन ने कोर्ट को बताया कि यह विवाद वर्ष 2017 की दरोगा बहाली से जुड़ा है. उस समय दो अलग अलग विज्ञापनों के जरिए नियुक्तियां हुई थीं, जिनमें एक सीधी भर्ती थी और दूसरी सीमित विभागीय परीक्षा के माध्यम से थी. आरोप है कि सीधी नियुक्ति का विज्ञापन पहले आने के बावजूद, विभाग ने वरीयता सूची में विभागीय परीक्षा वाले अधिकारियों को ऊपर स्थान दे दिया. इसे नियमों के विरुद्ध बताते हुए कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की गई है, जिसके कारण वर्तमान में प्रमोशन प्रक्रिया अधर में लटक गई है.
खनन कानूनों के दुरुपयोग पर सरकार से मांगा समाधान
एक अन्य महत्वपूर्ण मामले में, खनन कानूनों के तहत प्रशासनिक शक्तियों के कथित दुरुपयोग को लेकर चीफ जस्टिस एम एस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने सरकार के प्रति कड़ी नाराजगी जताई है. अशोक सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने सरकार को समाधान प्रस्तुत करने के लिए एक महीने का समय दिया है. कोर्ट ने मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से इस मामले की निगरानी करने का निर्देश दिया है. मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आम लोगों की समस्याओं के समाधान में देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
वाहन नीलामी मामले में लातेहार के पूर्व डीसी से पूछताछ
सुनवाई के दौरान अवैध खनन और परिवहन मामले में जब्त वाहन की जल्दबाजी में की गई नीलामी का मुद्दा भी उठा. लातेहार के तत्कालीन डीसी भोर सिंह यादव वर्चुअल माध्यम से कोर्ट में पेश हुए. अदालत ने उनसे सवाल किया कि जब मामले की रिवीजन याचिका लंबित थी, तो वाहन की नीलामी इतनी जल्दबाजी में क्यों की गई. कोर्ट ने सरकार के रवैये पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अधिकारी समस्याओं का समाधान निकालने के बजाय प्रक्रिया में अनावश्यक देरी कर रहे हैं. इस मामले की अगली सुनवाई अब 17 जून 2026 को होगी.